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July 24, 2025, 5:01 pm
KHABAR : सड़क नहीं मिली तो बेटियों ने बिछा दी चारपाई, गांव में नहीं पहुंचा विकास, बीमार बाप को कांधे पर उठाया, कीचड़-दलदल के रास्ते डेढ़ किलोमीटर सफर कर पहुंचाया अस्पताल, पढे़ खबर

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भोपाल। ये खबर सिर्फ एक गांव की नहीं, ये पूरे सिस्टम की लाचारी का आइना है। मध्यप्रदेश के रीवा जिले की जनपद पंचायत गंगेव के ग्राम बहेरा से एक तस्वीर आई है जो सीधा आपके दिल को चीर देगी। जहां न सरकार पहुंची न सड़क बनी तो एक बीमार बुजुर्ग को बेटियों ने चारपाई पर लिटाकर एक किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया।


जरा सोचिए३ 2025 में, स्मार्ट इंडिया के सपनों के बीच जब बेटियां अपने बीमार पिता को कांधों पर उठाकर अस्पताल ले जाएं तो दोष बीमारी का नहीं, सिस्टम की संवेदनहीनता का होता है। यह खबर आंखें खोलने वाली है और ज़मीर झकझोरने वाली भी। यह दृश्य किसी पिछली सदी का नहीं, बल्कि आज का है। जब बेटियां अपने बीमार पिता को चारपाई पर लिटाकर कीचड़, दलदल और टूटी पगडंडियों के बीच से अस्पताल तक ले जाती हैं। डेढ़ किलोमीटर लंबी यह यात्रा सिर्फ बीमारी से नहीं, बल्कि बेबसी से भरी थी।


ग्राम पंचायत घुचियारी के ग्राम बहेरा में सड़क नहीं है, लेकिन विधायक जी के बयानों में विकास चौमुखी हो चुका है। सरपंच और सचिव विकास की वो चिट्ठी हैं, जो सिर्फ कागज़ पर चमकती है और जमीन पर सड़ती है।


सरकार की फाइलों में सड़कें बनीं, लेकिन गांव की ज़मीन पर नहीं
जो राशि शासन से आई थी, वो भ्रष्टाचार की खाई में समा गई और गांव वालों की तक़दीर फिर उसी चारपाई पर लटक गई। ना डोला चल पाया, ना एंबुलेंस आई। बेटियों के कंधे ही शासन की सेवा बन गए। जब सड़कें सिर्फ घोषणाओं में और स्वास्थ्य सुविधाएं केवल चुनावी नारों में सीमित रह जाएं तो आम आदमी की बेटियां ही अंतिम सहारा बनती हैं। वो बेटियां आज नारा नहीं लगा रहीं, वो न्याय उठा रही हैं३ चारपाई के रूप में। क्या यही है हमारा विकास ? क्या यही है सुशासन ?


एक ओर हम चंद्रयान भेजते हैं और दूसरी ओर एक बुजुर्ग को अस्पताल ले जाने के लिए बेटियों को चारपाई उठानी पड़ती है। यह दो भारत की तस्वीर नहीं, यह उस एक भारत का सच है, जिसे विकास के नाम पर हर बार ठगा गया है।

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