चित्तौड़गढ़। बाघों के संरक्षण और जंगलों की महत्ता को रेखांकित करने के लिए जयपुर आर्ट समिट ने अपनी रचनात्मक पहल की है। जिसमें चित्तौड़गढ़ के पर्यावरणीय कलाकार डॉ.मुकेश शर्मा ने भाग लिया। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में 22 से 26 जुलाई तक आयोजित पांच दिवसीय दूसरे अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय आर्ट कैंप का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश के 27 से अधिक कलाकार भाग लिया। यह आयोजन एस्ट्रल पाइप्स और आरटीडीसी के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
‘बाघ बचाओ’ को समर्पित इस कार्यक्रम में कलाकारों का लाइव पेंटिंग डेमोंस्ट्रेशन किया। जयपुर आर्ट समिट के संस्थापक निदेशक शैलेन्द्र कृष्ण भट्ट ने कि उनकी टीम पिछले तीन वर्षों से रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में भ्रमण कर रही है और यहां के वन्य जीवन, खासकर बाघों की उपस्थिति ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। भट्ट के अनुसार, “यह सिर्फ कला शिविर नहीं, एक संवेदनशील प्रयास रहा है कृ उन वन रक्षकों को सम्मान देने का जो जंगलों की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं।
कैम्प के क्यूरेटर विजय कुमावत ने बताया कि कलाकार इस दौरान शिकार विरोधी जागरूकता, रचनात्मक इको-टूरिज़्म और बाघ संरक्षण परियोजनाओं को समर्थन देने जैसे संदेशों को अपनी कलाकृतियों में उकेरी, कार्यक्रम का उद्घाटन कानाराम आईएएस, (जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सवाई माधोपुर), ?अनूप के. आर (मुख्य वन संरक्षक, रणथंभौर बाघ परियोजना, सवाई माधोपुर), मधुसूदन सिंह (उपनिदेशक, पर्यटन विभाग, सवाई माधोपुर), रामानंद भाकर (उप वन संरक्षक, रणथंभौर बाघ परियोजना प्रथम सवाई माधोपुर), डॉ. धर्मेंद्र खांडल निदेशक, टाइगर वॉच रणथंभोर), शैलेन्द्र भट्ट (संस्थापक निदेशक, जयपुर आर्ट समिट) रामनारायण कुमावत (समाजसेवी एवं कलाकार, सवाई माधोपुर) और विजय कुमावत (शिविर संयोजक) द्वारा कला शिविर का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत उदघाटन किया।
डॉ. मुकेश शर्मा ने समसामयिक व लोक कला शैली के द्वारा पारम्परिक बाघ का चित्रण किया,शर्मा ने बताया कि कई वर्षाे पूर्व चित्तौड़गढ़ बाघों की आश्रय स्थली रहा है चित्तौड़गढ़ के पीछे अभयपुर घाटा, केलझर महादेव,बस्सी सेंचुरी, जोगणिया माता व मेनाल के जंगलों में इनका स्थल था है ,परन्तु वन्यजीव जागरुकता की कमी के कारण यह लुप्तप्रायरू होगया हैं, जोगणिया माता मंदिर व जिले के कई शक्तिपीठ में आज भी उनके पारम्परिक मूर्तिशिल्प में बाघों को पूजा जाता हैं , परंपरागत शैली से बाघ का चित्र सृजित किया हैं व दूसरी कृति में रणथंभौर की जैव विविधिता को जौहर विषय के साथ चित्रित किया गया जिसमें राणा हम्मीर के समय में रंगादेवी ने जल जौहर किया।
इस कैम्प में भाग लेने वाले प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय कलाकार शामिल हैं। विदेशों से - एनटीना अनास्तासियादौ (ग्रीस), विंसेंट सीट, टैन ली ली, शिवाली माथुर (सिंगापुर), रसिथा संजीवा, इसुरु सुरेन, के. डी. लक्ष्मण, ईशान गुनाथिलका (श्रीलंका) राजस्थान से - शरद भारद्वाज, डॉ.मुकेश कुमार शर्मा, सुनील जांगिड़, ताराचंद शर्मा, रवि माइकल, श्वेता माथुर, रश्मि राजावत, श्वेता नैना, ओमप्रकाश महावर, राजकुमार शाक्यवाल, विजय कुमावत अन्य राज्यों से - अमिता खरे, प्रतिमा श्रीवास्तव, हर्षित परिहार, गुलशन कुशवाह, आशी शर्मा, स्मिता भंडारी, शीतल आचार्य आदि ने भाग लिया।