कुकड़ेश्वर। सरकारें चाहे जितने भी दावे करें कि ष्हर गरीब को पक्का मकान मिलेगाष्, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जनपद पंचायत मनासा की ग्राम पंचायत फुलपुरा के गांव कड़ी खुर्द से, जहां एक गरीब किसान का कच्चा मकान लगातार बारिश के चलते धराशायी हो गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।
गांव के निवासी मोतीलाल चौधरी अपने परिवार के साथ एक कच्चे मकान में रहते थे। बीते कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण मकान की दीवारें पहले से ही कमजोर हो चुकी थीं। बीती रात जब उनका पुत्र नरेन्द्र कुमार घर पर मौजूद था, तो उसने देखा कि एक दीवार हल्की खिसक रही है। उसने तत्परता दिखाते हुए पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सुबह होते-होते मकान की एक-एक कर सभी दीवारें गिर गईं और पूरा मकान ध्वस्त हो गया।
मोतीलाल चौधरी का परिवार विगत कई वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन करता आ रहा है। कई बार उच्च अधिकारियों से लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव तक गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। ग्राम पंचायत स्तर पर जानकारी दी जाती है कि उनका नाम सूची में दर्ज है, जियो टैगिंग भी हो चुकी है, लेकिन आवास ष्ऊपर से आता हैष्, यह कह कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
बेटे नरेन्द्र चौधरी ने हादसे की जानकारी सरपंच, सहसचिव एवं हल्का पटवारी को दी है तथा निवेदन किया है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कर शासन-प्रशासन से चर्चा कर परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलवाया जाए।
यह घटना सरकार की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। एक ओर विकास के दावे हैं, दूसरी ओर गरीब अब भी एक पक्की छत के लिए तरस रहा है। समय रहते प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया, तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।