छतरपुर। जिला के राजनगर के ग्राम नवादा के आदिवासियों ने वन विभाग खजुराहो परिक्षेत्र के खिलाफ जिला कलेक्टर को शिकायती आवेदन सौंपा है। इसमें आरोप लगाया गया है कि वन विभाग के कर्मचारी आदिवासियों को धमका रहे हैं और उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं।
आदिवासियों ने बताया करीब 150 वर्षों से वे अपनी भूमि पर खेती कर रहे हैं, जिस पर उनके पूर्वजों को शासन द्वारा पट्टे 1939 में आवंटित किए गए थे। वन विभाग के अधिकारी कथित रूप से कह रहे हैं कि अगली फसल बोई तो सभी पर केस दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा। 14 जुलाई 2025 को रेंजर स्तर के अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से चेतावनी दी कि भूमि खाली करो, वरना कार्रवाई की जाएगी।
प्रमोद आदिवासी सहित समस्त आदिवासीगणों ने ज्ञापन में कहा कि यदि उन्हें भूमि से हटाया गया तो उनके पास रोज़गार और जीविका का कोई अन्य साधन नहीं बचेगा और वे भूखमरी की स्थिति में आ जाएंगे। ज्ञापन में आदिवासियों ने यह भी कहा कि वन विभाग के कुछ कर्मचारी रूपयों की भी अवैध वसूली कर रहे हैं और केस में फंसाने की धमकी देकर मानसिक प्रताड़ना दे रहे हैं। आदिवासियों की मांग वन विभाग को तत्काल ग्राम नवादा की आदिवासी भूमि में हस्तक्षेप से रोका जाए। उन्हें स्वतंत्र रूप से खेती करने की अनुमति दी जाए। धमकी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच व कार्रवाई की जाए।
तहसीलदार ऋतु सिंघई ने बताया कि आदिवासियों ने आवेदन दिया है जिसमे वन कर्मी पर पैसे लेने के आरोप लगे हैं उनके 1939 के पट्टे है उसकी एसडीएम से जांच कराई जाएगी दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।
पूर्व विधायक कुंवर विक्रम सिंह नातीराजा ने कहा वन विभाग द्वारा नारायणपुरा, दोगुआं, सेवड़ी, नबादा सभी जगह आदिवासियों और अन्य लोगों की जमीनों से बेदखल किया जा रहा है इससे इन गरीबों को भरण पोषण का संकट पैदा हो जाएगा। वन विभाग को सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन करना चाहिए। इनमें से कुछ लोगों के जमीन के पट्टे रियासत समय के है देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति चाहे तो उन गरीबों को जमीन दिला सकते हैं।