चित्तौड़गढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चित्तौड़ नगर की 18 बस्तियों में से 16 बस्तियों में को विजयादशमी उत्सव आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में संघ की स्थापना, उद्देश्य तथा 100 वर्षों की साधना पर विस्तार से चर्चा हुई।
दुर्ग राज बस्ती के कार्यक्रम में प्रभु लाल पालीवाल मुख्य पुजारी बाणमाता व अन्नपूर्णा माता मन्दिर दुर्ग मुख्य अतिथि रहे । आयोजित उत्सव में मुख्य वक्ता दिनेश भट्ट, विभाग कार्यवाह ने संघ की स्थापना, उसके मूल उद्देश्य तथा राष्ट्र निर्माण की दिशा में संघ के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी और बीते 100 वर्षों में संघ ने समाज को संगठित कर राष्ट्र जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
केशव बस्ती के कार्यक्रम में दिग्विजय राम महाराज रामस्नेही संप्रदाय मुख्य अतिथि रहे। मुख्य वक्ता में प्रकाश मेहता , भारतीय किसान संघ, प्रांत कोषाध्यक्ष , चित्तौड़ प्रान्त ने संघ का ध्येय स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से जागृत राष्ट्र के रूप में स्थापित करना संघ का प्रमुख उद्देश्य है। जाति, प्रांत, भाषा और पंथ से ऊपर उठकर समरसता की भावना विकसित करना, शिक्षा, ग्राम विकास, सेवा, पर्यावरण और संस्कृति के क्षेत्र में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना संघ की मूल प्रेरणा रही है।
हरि बद्र सुरी बस्ती के कार्यक्रम में हेमंत जैन , विभाग संघचालक चित्तौड़गढ़ मुख्य अतिथि रहे । उन्होंने शस्त्र पूजन किया। मुख्य वक्ता भूपेंद्र आचार्य, मुख्य मार्ग प्रमुख, चित्तौड़ प्रान्त के 100 वर्षों की साधना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1925 से 1940 तक डॉ. हेडगेवार के कालखंड में संघ कार्य का बीजारोपण हुआ। 1940 से 1973 के बीच पूजनीय श्री गुरुजी माधव सदाशिव गोलवलकर के काल में संघ का कार्य राष्ट्रव्यापी स्तर पर विस्तारित हुआ। 1975 के आपातकाल में प्रतिबंधों के बावजूद संघ और अधिक सशक्त रूप में उभरा।
राणा प्रताप बस्ती के कार्यक्रम में श्री श्री 1008 महंत मोहनदास जी त्यागी बाबा घाट चंदेरिया मुख्य अतिथि रहे । मुख्य वक्ता अनिरूद्ध भाटी, जिला संघ चालक ने “संघ और समाज का एकाकार” विषय पर अपने विचार रखे और बताया कि आज समाज का प्रत्येक वर्ग संघ कार्य से जुड़ने की इच्छा प्रकट कर रहा है।
दानवीर भामाशाह बस्ती के उत्सव में शंभू दास वैष्णव, सुखद जीवन संस्थान मुख्य अतिथि व अध्यक्ष शक्ति सिंह राणावत, रहे। उत्सव में मुख्य वक्ता बालूदास वैष्णव, विभाग कार्यकारिणी सदस्य ने संघ के वर्तमान स्वरूप और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज आरएसएस विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी एवं स्वावलंबी संगठन है। एक करोड़ से अधिक स्वयंसेवकों, लाखों शाखाओं और सहायक संगठनों के साथ संघ का कार्य 60 से अधिक देशों में फैल चुका है।
गोरा बादल बस्ती के उत्सव में मुख्य वक्ता धर्मपाल गोयल, प्रांत संयोजक पर्यावरण संरक्षण गतिविधि ने कहा कि संघ की शताब्दी यात्रा केवल संगठनात्मक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का प्रेरणास्रोत बनी है।
संत रैदास बस्ती के उत्सव में जगदीश शर्मा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि संघ पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन लाना चाहता हैं। इस अवसर पर एक विशेष दृश्य देखने को मिला जब ढाई वर्ष का नन्हा बालक हृदयांश पूर्ण गणवेश में शामिल होकर स्वयंसेवक बना।
चेतक बस्ती के उत्सव में सत्येंद्र कुमार मॉड , चमत्कारी सांवरिया सेठ मंदिर मंडल अध्यक्ष । मुख्य वक्ता जयवर्धन शर्मा जिला शारीरिक ने कहा कि समाज जीवन में परिवर्तन के लिए सबसे पहले हमें अपने अंदर परिवर्तन लाना होगा ।
राणा सांगा बस्ती के उत्सव में शंभू लाल रांका, सेवानिवृत बैंक कर्मचारी मुख्य अतिथि रहे । उत्सव में मुख्य वक्ता राजेश कुमार , जिला व्यवस्था प्रमुख ने संघ के पंच परिवर्तन विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि—
कुटुम्ब प्रबोधन – हमें पड़ोस और समाज में आपसी सहयोग व पारिवारिक एकता का संदेश देना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण – प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग कर पर्यावरण-संरक्षण के प्रयास करने चाहिए।
सामाजिक समरसता – समाज के प्रत्येक वर्ग को एकजुट कर समरस समाज का निर्माण करना हमारा दायित्व है।
स्व का बोध – स्वदेशी वस्तुओं को अपनाकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए।
नागरिक कर्तव्य – हमें अपने राष्ट्र के प्रति सभी कर्तव्यों को निष्ठा से निभाना चाहिए।
अतिथियों ने कहा कि विजयादशमी का पर्व सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है, और संघ का मूल उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाना है ।