भगवानपुरा। शासकीय महाविद्यालय भगवानपुरा में प्राचार्य डॉ. प्रकाश सोलंकी के मार्गदर्शन में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति में गुरु की महत्ता, ज्ञान परम्परा एवं नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं गुरु परम्परा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। प्राचार्य डॉ. प्रकाश सोलंकी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देकर उसके व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन, सेवा और समर्पण की भावना बनाए रखने का आह्वान किया।
महाविद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. रजनी सोलंकी ने गुरु पूर्णिमा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए महर्षि वेदव्यास के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है और यह गुरु के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है।
डॉ. सेवक चौहान ने विद्यार्थियों से गुरुजनों के मार्गदर्शन का अनुसरण करते हुए ज्ञान, अनुशासन, सेवा और सदाचार को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कविता, भाषण और विचार प्रस्तुति के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को रेखांकित किया तथा अपने गुरुजनों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की प्रभारी प्रो. नीलम सेनानी ने किया तथा आभार प्रो. प्रियंका वर्मा ने व्यक्त किया। अंत में सभी ने भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुरु परम्परा को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी मीडिया प्रभारी डॉ. दिनेश गाठे ने दी।