नई दिल्ली। जून 2026 में भारत की औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। देश के इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में वर्ष-दर-वर्ष 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले 23 महीनों का सर्वोच्च स्तर है। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूत होती गति और घरेलू मांग में निरंतर सुधार का संकेत देते हैं।
आईआईपी में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, बिजली एवं गैस आपूर्ति क्षेत्र ने 10.6 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज कर औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों में बढ़ती ऊर्जा मांग को रेखांकित किया। जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खनन एवं उत्खनन क्षेत्र में 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
औद्योगिक उत्पादन में आई इस तेजी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गेटफाइव (Getfive) के सह-संस्थापक श्रीकांत गोयल ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत के आईआईपी में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण और रोजगार सृजन में एमएसएमई क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए समय पर और पर्याप्त पूंजी उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके लिए सरकार तथा नियामक संस्थाओं को वित्तपोषण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना चाहिए, जिससे एमएसएमई अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप ऋण और इक्विटी के माध्यम से पूंजी जुटा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक उत्पादन में व्यापक स्तर पर दर्ज की गई यह वृद्धि आने वाली तिमाहियों में आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगी। विनिर्माण गतिविधियों में तेजी, बुनियादी ढांचे का विस्तार और मजबूत घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
ताजा आईआईपी आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत का औद्योगिक क्षेत्र मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है और विनिर्माण क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बना हुआ है।