कोटा। समाज में दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ एक मिसाल पेश करते हुए गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज के डॉ. कार्ष्णि भरतलाल शर्मा ने वधू पक्ष द्वारा दिया गया 1.11 करोड़ रुपये का दहेज यह कहते हुए लौटा दिया “हमें बेटी चाहिए, दहेज नहीं।”
डॉ. भरतलाल शर्मा, जिन्होंने रमनरेती श्रीकर्ष्णि संत श्री श्री 1008 सद्गुरु देव भगवान श्री गुरु शरणानंद जी महाराज से दीक्षा प्राप्त की है, साहित्याचार्य, ज्योतिषाचार्य, आयुर्वेदाचार्य, भागवताचार्य, हस्तरेखा मर्मज्ञ, वास्तु एवं राशि रत्न विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध हैं।
उनके सुपुत्र सत्यम शर्मा का विवाह आगामी 2 नवंबर को स्टेशन क्षेत्र निवासी सुषमा शर्मा की पुत्री दीक्षा से होने जा रहा है। विवाह की लगन 29 अक्टूबर को आचार्य भरतलाल शर्मा के निवास पर संपन्न हुई, जहां वधू पक्ष द्वारा दिए गए मकान, नकदी, गाड़ी, सोना-चांदी एवं अन्य उपहारों सहित कुल 1.11 करोड़ रुपये मूल्य के दहेज को उन्होंने यह कहकर लौटा दिया कि “दहेज लेना सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है, हमें केवल संस्कारी बेटी चाहिए।”
दीक्षा की मां सुषमा शर्मा, जो रेलवे विभाग से सेवानिवृत्त हैं, ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जीवनभर की कमाई बेटी की शादी में लगा दी थी। लेकिन वरपक्ष की इस संवेदनशील पहल से वे भावुक हो गईं।
बुधवार को हुई सगाई में लिया गया यह निर्णय न केवल दोनों परिवारों को जोड़ गया, बल्कि समाज में एक नई सोच और सकारात्मक संदेश भी दे गया। कोटा शहर में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग डॉ. भरतलाल शर्मा की इस पहल को समाज सुधार की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि डॉ. भरतलाल शर्मा देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हैं, जिनसे अनेक राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी परामर्श लेते हैं।
दहेज में दिया गया था-
50 लाख रुपये का मकान
13 लाख की गाड़ी
15 तोला सोने के आभूषण
3 किलो चांदी
11 लाख रुपये नकद
21 लाख रुपये का प्रतीकात्मक चेक
इस प्रेरणादायक जानकारी की पुष्टि हनुमान प्रसाद पंचारिया,
संरक्षक- महर्षि गौतम शिक्षण एवं शोध संस्थान, भुणावाय (अजमेर),
पूर्व मंत्री एवं जिला गौतमाश्रम ट्रस्ट, सवाई माधोपुर द्वारा की गई।