चित्तौड़गढ़। तेरापंथ के प्रथम आचार्य आचार्य भिक्षु स्वामी के त्रिशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आचार्य श्री महाश्रमणजी के इंगितानुसार तेरापंथ महासभा द्वारा संचालित श्तेरापंथ-मेरापंथश् कार्यशाला श्रृंखला के अंतर्गत चित्तौड़गढ़ स्थित तेरापंथ भवन में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धर्म, आध्यात्मिकता एवं तेरापंथ के सिद्धांतों पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
कार्यशाला में सूरत से पधारे उपासक गौतम वैदमूथा ने आचार्य भिक्षु के जीवन-दर्शन एवं तेरापंथ के मूल सिद्धांतों की सरल एवं प्रभावी व्याख्या करते हुए आध्यात्मिक विषयों पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। उन्होंने उपस्थितजनों को तेरापंथ की वैचारिक परंपरा और जीवन मूल्यों से अवगत कराया।
इस अवसर पर जैन विद्या परीक्षा प्रभारी उमा सुराणा ने जैन विद्या परीक्षा के सफल प्रतिभागियों को सम्मानित किया। उन्होंने पूरे भारतवर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली प्रीति बाबेल को विशेष सम्मान प्रदान करते हुए भविष्य में भी अधिकाधिक विद्यार्थियों को जैन विद्या परीक्षा में सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में तेरापंथ सभा के अध्यक्ष रजनीश खाब्या ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उपासक कमल जैन ने अपने उद्बोधन में तेरापंथ की आध्यात्मिक परंपराओं एवं संस्कारों की महत्ता पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के दौरान तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद एवं पूर्व महिला मंडल अध्यक्षा मंजू श्रीश्रीमाल द्वारा प्रेरणादायी गीतिका की प्रस्तुति दी गई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में ज्ञान कावड़िया एवं गोपाल मेहता ने आभार व्यक्त करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला श्रद्धा, ज्ञान एवं आध्यात्मिक जागरण के संदेश के साथ सम्पन्न हुई।