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February 28, 2026, 6:53 pm
KHABAR : ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित व नियम विरूद्ध प्रयोग पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर ने जारी किया प्रतिबंधात्मक आदेश, उल्लंघन की दशा में होगी कठोर कार्रवाई, पढ़े आरिफ मंसूरी की खबर

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झाबुआ। कानून व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर/डीजे/बैण्ड/प्रेशर हार्न) के अनियंत्रित व नियम विरुद्ध प्रयोग पर नियंत्रण हेतु जिले में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर नियंत्रण जनहित में आवश्यक है।

ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 की धारा 2 (ग) में जिला दण्डाधिकारी को जिले की सीमा में उक्त नियमों को लागू करने हेतु प्राधिकारी बनाया गया हैं अतः इस प्ररिप्रेक्ष्य में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नेहा मीना के अनुमोदन पर अपर कलेक्टर एवं अपर जिला दण्डाधिकारी चंदरसिंह सोलंकी द्वारा ध्वनि द्वारा प्रदूषण नियंत्रण हेतु भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 (1) (2) के तहत् झाबुआ जिले की राजस्व सीमा हेतु आदेशित किया है किः-
       1- झाबुआ जिले के अंतर्गत समस्त उत्सव/आयोजन के दौरान लाउड स्पीकर, डी.जे., बैण्ड, प्रेशर हार्न तथा अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग, विहित प्राधिकारी की अनुमति के बगैर प्रतिबंधित रहेगा।
       2- ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 द्वारा निर्धारित शेडयूल अनुसार निर्धारित ध्वनि का स्तर मानक सीमा से बाहर प्रतिबंधित रहेगा।
       3- रात्रि समय 10.00 बजे से सुबह 6.00 बजे तक किसी भी प्रकार के लाउड स्पीकर, डी.जे., बैण्ड, प्रेशर हार्न तथा अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग, पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होगा। 

चूंकि यह आदेश आम जनता के महत्व का है तथा आम जनता को सम्बोधित है जिसकी व्यक्तिशः सूचना दी जाना संभव नहीं होने से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163(2) के तहत एकपक्षीय पारित किया जाता है उक्त आदेश 01 मार्च 2026 से 01  मई 2026 तक प्रभावशील रहेगा तथा उक्त प्रभावशील अवधि में उक्त आदेश का उल्लघंन भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 अन्तर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। 

शासन द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के तारतम्य में आम जन को इस तथ्य से अवगत कराया जाना अत्यन्त आवश्यक है कि 14 फरवरी 2000 को केन्द्र सरकार ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग कर सार्वजनिक स्थलों में विभिन्न स्रोतों द्वारा होने वाले ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 को अधिनियमित किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एवं म.प्र. उच्च न्यायालय खण्डपीठ जबलपुर द्वारा ध्वनि प्रदुषण नियंत्रण के संबंध में जारी निर्देशों के कड़ाई से अनुपालन कराने तथा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित किये जाने के संबंध में प्रभावी कार्यवाही हेतु निर्देश दिये गये है यह नियम म.प्र. राज्य में भी लागू है, शहर में ध्वनि विस्तारक यंत्र, लाउड स्पीकर, डी.जे. बैण्ड इत्यादि के प्रयोग से ध्वनि का स्तर बढ़ता है ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के उल्लघंन के संबंध में उच्चतम न्यायालय, खण्डपीठ ने ध्वनि प्रदूषण पर फैसला देते हुए लाउडस्पीकरों और हार्न के यहां तक कि निजी आवासों में भी इस्तेमाल पर व्यापक दिशा निर्देश जारी किए हैं जिसमें लाउडस्पीकरों, वाहनों आदि से उत्पन्न होने वाले शोर आदि को भी कवर किया गया है।

ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 यथासंशोधित के नियम 3(1) व 4(1) के अनुसार नियमावली के शेड्यूल में Ambient Air Quality Standards पद respect of Noice Pollution के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों जैसे औद्यौगिक, वाणिज्यिक, रिहायसी व शांत क्षेत्र में दिन व रात के समय अधिकतम ध्वनि तीव्रता निर्धारित की गई है जो निम्नवत है:- 
औद्योगिक क्षेत्र में प्रातः 06.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक 75 डेसीबल, रात्रि 10:00 बजे से प्रातः 06.00 बजे तक 70 डेसीबल, वाणिज्यिक क्षेत्र में प्रातः 06.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक 65 डेसीबल, रात्रि 10:00 बजे से प्रातः 06.00 बजे तक 55 डेसीबल, आवासीय क्षेत्र में प्रातः 06.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक 55 डेसीबल, रात्रि 10:00 बजे से प्रातः 06.00 बजे तक 45 डेसीबल, शांत क्षेत्र में प्रातः 06.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक 50 डेसीबल, रात्रि 10:00 बजे से प्रातः 06.00 बजे तक 40 डेसीबल निर्धारित की गई है। 

म.प्र.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गत वर्षों में समय-समय पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों क्रमशः शांत क्षेत्र, रहवासी क्षेत्र, व्यावसायिक क्षेत्र एवं औद्योगिक क्षेत्र में परिवेशीय ध्वनि मापन का कार्य किया गया तथा यह पाया गया हैं कि उक्त क्षेत्रों में ध्वनि का स्तर मानक सीमा से अधिक है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आगामी त्यौहारों के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों, लाउड स्पीकर एवं डी.जे. इत्यादि के प्रयोग से ध्वनि प्रदूषण बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है एवं म.प्र. शासन, गृह विभाग वल्लभ भवन के द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के निर्देश प्राप्त हुए है।

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