चित्तौड़गढ़। सरकार द्वारा आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के तहत सत्र 2026-27 के लिए निशुल्क प्रवेश की गाइडलाइन जारी कर दी गई है, लेकिन इसमें कई विसंगतियों के कारण प्रदेश के निजी विद्यालय असमंजस में हैं। इस मुद्दे को लेकर निजी विद्यालयों, अभिभावक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा ज्ञापन और धरनों का दौर जारी है।
जिले के सभी निजी विद्यालयों ने शिक्षा मंत्री के नाम जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। सीसा के जिला संरक्षक दिलीप पोखरना ने बताया कि विभाग द्वारा प्रति विद्यार्थी पुनर्भरण राशि अन्यायपूर्ण ढंग से कम निर्धारित की गई है, जबकि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद पिछले तीन वर्षों से प्री-प्राइमरी कक्षा के विद्यार्थियों का पुनर्भुगतान नहीं किया गया।
सीसा के जिलाध्यक्ष जयश भटनागर ने कहा कि निजी विद्यालय पूर्ण निष्ठा के साथ आरटीई के तहत निरूशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन विभाग अपनी ही गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहा है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश वैष्णव ने कहा कि प्रवेश और पुनर्भुगतान की स्पष्ट स्थिति नहीं होने से अभिभावक और विद्यालय दोनों असमंजस में हैं।
संस्था के सचिव सुमित माहेश्वरी ने चेतावनी दी कि यदि अन्यायपूर्ण रवैया जारी रहा, तो निजी विद्यालय मजबूरी में उग्र आंदोलन कर सकते हैं और स्कूल बंद कर घेराव करने पर मजबूर होंगे।
इस अवसर पर शेखर कुमावत, योगेश अग्रवाल, रवि अग्रवाल, जितेश श्रीवास्तव, नरेन्द्र वर्मा, लक्ष्मण सिंह, अर्पित शर्मा, योगेश कन्नोजिया, अरुण कुमावत, प्रकाश चन्द्र चौधरी, कविता अरोड़ा, माया साहू, धीरज बिलोची, रोहित नाहर, गुंजन गोठवाल, नफीस हुसैन, हीरालाल जाट, रविकान्त पालीवाल, प्रेमलता तिवाड़ी सहित कई गैर-शिक्षण संस्थान संचालक उपस्थित रहे।