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April 22, 2026, 7:42 pm
KHABAR : जल गंगा जल संवर्धन अभियान के तहत जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित, कलेक्टर अदिती गर्ग ने कहा- अधिकाधिक पौधारोपण कर हरित भविष्य का संकल्प लें, पढ़े खबर 

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मंदसौर। विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के अंतर्गत आज कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में जल संरक्षण विषय पर एक जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सार्थक एनजीओ के माध्यम से संपन्न हुई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम में कलेक्टर अदिती गर्ग, पद्मश्री महेश शर्मा, भूजल वैज्ञानिक सुनील चतुर्वेदी, सार्थक एनजीओ की संस्थापक डॉ. उर्मिला तोमर सहित ग्राम सचिव, सहायक सचिव एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर अदिती गर्ग ने जल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिले में “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के अंतर्गत लगभग 6000 छोटे-बड़े कार्य संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण का कोई भी प्रयास छोटा नहीं होता, बल्कि छोटे-छोटे कार्य ही लंबे समय में बड़े परिणाम देते हैं।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों को सूक्ष्म स्तर पर समझकर उनके व्यवहारिक समाधान निकालना आवश्यक है तथा उनका क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मॉडल कार्य विकसित किए जाएं, जिन्हें अन्य लोग भी अपनाकर प्रेरणा ले सकें।

कार्यक्रम में पद्मश्री महेश शर्मा, जिन्हें “जल ऋषि” के नाम से भी जाना जाता है, ने पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं और वृक्षों की अनावश्यक कटाई से बचा जाए। उन्होंने कहा कि प्रकृति से केवल लेना नहीं, बल्कि उसे लौटाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

भूजल वैज्ञानिक सुनील चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में बताया कि विश्व का लगभग 70 प्रतिशत पानी स्वच्छ नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) को आवश्यक बताते हुए वैज्ञानिक तरीकों से जल संरक्षण अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन के कारण जल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

इस अवसर पर “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के अंतर्गत स्कूलों द्वारा आयोजित चित्रकला, रंगोली एवं जल संरक्षण विषयक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों द्वारा जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रश्न भी पूछे गए, जिनका विशेषज्ञों ने सरल एवं वैज्ञानिक तरीके से समाधान प्रस्तुत किया।

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