भोपाल। यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शुक्रवार को शहर में सप्लाई किए जा रहे पेयजल को लेकर गंभीर आरोप लगाए। संगठनों का दावा है कि भोपाल नगर निगम कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति कर रहा है, जिससे इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति बनने का खतरा पैदा हो गया है।
संगठनों ने प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक की। रिपोर्ट के मुताबिक जांचे गए पानी के करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म (मल से जुड़े बैक्टीरिया) पाए गए। इससे संकेत मिलता है कि इन इलाकों में बड़ी मात्रा में मल से दूषित पानी लोगों तक पहुंच रहा है।
भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने बताया कि इस महीने 30 बस्तियों के नलों से 63 पानी के नमूने एकत्र किए गए थे। इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। उनके अनुसार, इसका मतलब है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों को दूषित पेयजल मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि बड़ा तालाब (अपर लेक) से सप्लाई किए गए पानी के 90 प्रतिशत नमूने और कोलार डैम से सप्लाई किए गए पानी के 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में दूषित पाए गए।
दूषित पानी से बढ़ रहीं गंभीर बीमारियां
संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों के लोग लंबे समय से सीवेज से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड समेत जलजनित बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने बताया कि साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से यहां का भूजल जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद कोर्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाकर लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
आठ साल से शिकायत, फिर भी नहीं बिछी सीवर लाइन
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि अगस्त 2018 में पेयजल में मल मिलने की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को प्रभावित क्षेत्रों में सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने का आदेश दिया था। नगर निगम ने तीन महीने में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने दूषित पेयजल की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाला जा रहा है।
भागीरथपुरा जैसी घटना का इंतजार करने के बजाय दोषियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था भी तत्काल शुरू की जाए।