BREAKING NEWS
KHABAR : नीमच के श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या.. <<     दिल्ली में छात्रों के साथ कथित बर्बरता के.. <<     BIG NEWS : आगे-आगे बाइक, पीछे नशे की खेप से भरी.. <<     BIG REPORT : खेल मैदान बचाने की मुहिम जारी, संघर्ष.. <<     KHABAR : अवैध बालू उत्खनन पर खूनी संघर्ष, खेत मालिक.. <<     KHABAR : 7 दिवसीय सिविल डिफेंस प्रशिक्षण सम्पन्न, 150.. <<     REPORT : विश्व मानव दुर्व्यापार निरोधी दिवस पर.. <<     KHABAR : खरगोन पुलिस का जनजागरूकता कार्यक्रम,.. <<     REPORT : कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बने सब इंस्पेक्टर.. <<     KHABAR : दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित.. <<     KHABAR : 60 प्रतिशत मूंग खरीदी के फैसले पर सपा ने.. <<     VIDEO NEWS: नीमच में 'मध्यप्रदेश शासन आयकर विभाग'.. <<     KHABAR : ग्रीन हाईवे में मध्यप्रदेश नंबर-1, पांच.. <<     NEWS : जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने की ग्रामीण विकास.. <<     BIG NEWS : नीमच के पेट्रोल पंप पर हाईवोल्टेज.. <<     डीजे गाड़ी में वेल्डिंग के दौरान हादसा या.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
July 31, 2026, 3:29 pm
KHABAR : ग्रीन हाईवे में मध्यप्रदेश नंबर-1, पांच साल में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए 39 लाख से अधिक पौधे, देशभर में हुए पौधारोपण का 11 प्रतिशत योगदान अकेले एमपी का, ड्रोन मॉनिटरिंग और मियावाकी तकनीक से हो रही निगरानी, पढे़ खबर 

Share On:-

भोपाल। राष्ट्रीय राजमार्गों को हरित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश ने देशभर में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। केंद्र सरकार की ग्रीन हाईवे पॉलिसी-2015 के तहत पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 39.26 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जो देश में सबसे अधिक है।


राज्यसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देशभर में पिछले पांच वर्षों के दौरान लगभग 1.32 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 3.61 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया। इसमें अकेले मध्यप्रदेश का योगदान करीब 11 प्रतिशत रहा है।


सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, सबसे कम पौधारोपण मेघालय में हुआ, जहां पांच वर्षों में केवल 2 हजार पौधे लगाए गए। इसके बाद अंडमान एवं निकोबार, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और केरल जैसे राज्य व केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।


सरकार पौधों की सुरक्षा और उनकी नियमित निगरानी के लिए ड्रोन मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग कर रही है। वहीं कम जगह में अधिक हरियाली विकसित करने के लिए मियावाकी तकनीक अपनाई जा रही है। इसके अलावा हाईवे निर्माण के दौरान कटने वाले पेड़ों की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति पौधारोपण और वैज्ञानिक वृक्ष प्रत्यारोपण भी किया जा रहा है।


राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए रीसाइकिल प्लास्टिक, फ्लाई ऐश, रीक्लेम्ड एस्फाल्ट, क्रम्ब रबर और बायो-बिटुमेन जैसी पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही बांस के क्रैश बैरियर, जूट एवं नारियल जटा से बने जियो-टेक्सटाइल्स तथा उपचारित जल के उपयोग जैसी तकनीकों को भी अपनाया जा रहा है।


ग्रीन हाईवे नीति के तहत पौधारोपण और पर्यावरणीय संरक्षण पर होने वाला खर्च संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की स्वीकृत लागत में ही शामिल किया जाता है, जिससे हरित विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता मिल रही है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE