भोपाल। राष्ट्रीय राजमार्गों को हरित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश ने देशभर में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। केंद्र सरकार की ग्रीन हाईवे पॉलिसी-2015 के तहत पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 39.26 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जो देश में सबसे अधिक है।
राज्यसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देशभर में पिछले पांच वर्षों के दौरान लगभग 1.32 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 3.61 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया। इसमें अकेले मध्यप्रदेश का योगदान करीब 11 प्रतिशत रहा है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, सबसे कम पौधारोपण मेघालय में हुआ, जहां पांच वर्षों में केवल 2 हजार पौधे लगाए गए। इसके बाद अंडमान एवं निकोबार, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और केरल जैसे राज्य व केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।
सरकार पौधों की सुरक्षा और उनकी नियमित निगरानी के लिए ड्रोन मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग कर रही है। वहीं कम जगह में अधिक हरियाली विकसित करने के लिए मियावाकी तकनीक अपनाई जा रही है। इसके अलावा हाईवे निर्माण के दौरान कटने वाले पेड़ों की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति पौधारोपण और वैज्ञानिक वृक्ष प्रत्यारोपण भी किया जा रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए रीसाइकिल प्लास्टिक, फ्लाई ऐश, रीक्लेम्ड एस्फाल्ट, क्रम्ब रबर और बायो-बिटुमेन जैसी पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही बांस के क्रैश बैरियर, जूट एवं नारियल जटा से बने जियो-टेक्सटाइल्स तथा उपचारित जल के उपयोग जैसी तकनीकों को भी अपनाया जा रहा है।
ग्रीन हाईवे नीति के तहत पौधारोपण और पर्यावरणीय संरक्षण पर होने वाला खर्च संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की स्वीकृत लागत में ही शामिल किया जाता है, जिससे हरित विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता मिल रही है।