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May 5, 2026, 12:29 pm
KHABAR : जिन स्कूलों में 40 प्रतिशत से कम रिजल्ट, उनके शिक्षकों का टेस्ट, जिला प्रशासन ने ली फिसड्डी शिक्षकों की परीक्षा, वेतन रोका, दो निलंबित, चेतावनी भी दी‎, पढे़ खबर 

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राजगढ़। प्रदेश में सरकारी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर विरोध और आंदोलन जारी हैं, वहीं राजगढ़ में हालात ऐसे बन गए कि जिला प्रशासन को खुद फिसड्डी शिक्षकों की परीक्षा लेनी पड़ी।


40 प्रतिशत से कम परिणाम देने वाले स्कूलों के प्राचार्यों और विषय शिक्षकों को बुलाकर पहले उनकी कड़ी समीक्षा की गई, फिर उन्हें परीक्षार्थी की तरह बैठाकर टेस्ट लिया गया।


यह प्रक्रिया प्रदेश में अपने तरह की अलग पहल मानी जा रही है। बता दें कि भास्कर ने सबसे पहले 24 अप्रैल के अंक में “70 प्रतिशत रिजल्ट का सरकारी ढिंढेारा, 40 प्रतिशत रिजल्ट भी नहीं दे पाए 11 सरकारी स्कूल शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों पर सख्ती दिखाई है।


कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देश पर जिला पंचायत के सीईओ इच्छित गढ़पाले ने डाइट परिसर में समीक्षा बैठक आयोजित की। इसमें कमजोर परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षक शामिल हुए। एक-एक कर विषयवार परिणामों की समीक्षा की गई, जहां कई स्कूलों में शैक्षणिक स्तर बेहद कमजोर मिला। इसके बाद पहले से तय कार्ययोजना के अनुसार संबंधित विषय के शिक्षकों को उसी विषय का प्रश्न-पत्र देकर परीक्षा दिलाई गई।


20-22 प्रश्न, 100 अंक, तीन सेट... नकल नहीं कर पाए
प्रश्न-पत्र डाइट के प्राचार्य द्वारा पूरी गोपनीयता के साथ विषय विशेषज्ञ शिक्षकों से तैयार कराए गए थे। इसमें 20 से 22 प्रश्न शामिल किए गए और कुल अंक 100 थे। नकल या आपसी मदद रोकने के लिए तीन अलग-अलग सेट बनाए गए। सीईओ ने परीक्षा कक्ष में साफ कहा- आप विषय के जानकार हैं, प्रश्न-पत्र जल्दी हल करें। सीईओ ने सभी को एक घंटे का समय दिया, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि दक्षता में कमी पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।


महिला शिक्षक रो पड़ीं, बोलीं- 16 साल अच्छा रिजल्ट दिया
समीक्षा और परीक्षा के दौरान एक भावुक दृश्य भी सामने आया, जब एक महिला शिक्षक फूट-फूट कर रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि वे 16 साल से अच्छे परिणाम देती रही हैं, इस बार गलती हो गई, इसलिए उन्हें डांट सुननी पड़ रही है। इसके बावजूद परीक्षा प्रक्रिया जारी रही और सभी शिक्षकों को टेस्ट देना पड़ा।


30ः से कम रिजल्ट देने वाले अतिथि शिक्षकों को हटाने का फैसला लिया था
पिछले दिनों प्रशासन ने 30ः से कम रिजल्ट देने वाले अतिथि शिक्षकों को हटाने का फैसला लिया था। इसके बाद ऐसे अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गई थीं। उसी कड़ी में नियमित शिक्षकों और प्राचार्यों की सीधे परीक्षा ली है, जिससे साफ है कि प्रशासन इस बार परिणाम सुधार को लेकर सख्त रुख में है।


रिजल्ट खराब नहीं होना चाहिए
हमने कमजोर रिजल्ट वाले शिक्षकों की परीक्षा ली है। हम चाहते हैं कि रिजल्ट खराब नहीं होना चाहिए, यदि खराब हुआ है, तो जिम्मेदार शिक्षक ही हैं। चेतावनी दी है कि यदि सेकंड परीक्षा में बच्चों का रिजल्ट नहीं सुधरा, तो खैर नहीं और हां, यदि रिजल्ट सुधार लिया, तो कार्रवाई से मुक्त कर दिए जाएंगे।

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