नीमच। गंगा दशहरा के अवसर पर जल संरक्षण और जनभागीदारी की अनूठी मिसाल उस समय देखने को मिली, जब सावन कुंड स्थित प्राचीन बावड़ी पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर श्रमदान किया। श्रमदान की इस सुखद बयार ने वर्षों पुरानी बावड़ी को नई पहचान देने के साथ जल स्रोतों के संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश भी दिया।
कार्यक्रम में सांसद सुधीर गुप्ता/ गुर्जर (जैसा उपयुक्त हो), कलेक्टर हिमांशु चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने हाथों में फावड़े और तसले लेकर बावड़ी की साफ-सफाई एवं गहरीकरण कार्य में भाग लिया।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो जल संकट जैसी गंभीर समस्या से प्रभावी रूप से निपटा जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने “जल है तो कल है” का संदेश देते हुए वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं जल बचत की आवश्यकता पर जोर दिया। श्रमदान के दौरान युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
प्रशासन द्वारा बताया गया कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत जिले में विभिन्न स्थानों पर तालाब, कुएं, बावड़ियों और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के कार्य किए जा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।