जीरन। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ और लापरवाही के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन नीमच जिले के जीरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से जो मामला सामने आया है, उसने पूरे स्वास्थ्य महकमे की साख पर बट्टा लगा दिया है। यहाँ लैब टेक्नीशियन और स्टाफ का एक ऐसा कारनामा उजागर हुआ है, जिसे देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। यहाँ मरीजों का इलाज श्भगवान भरोसेश् नहीं, बल्कि अंधा बांटे रेवड़ी वाली तर्ज पर चल रहा है। लैब स्टाफ ने बिना यूरिन टेस्ट किए ही सीधे फाइनल रिपोर्ट बनाकर मरीज के हाथ में थमा दी। शर्मनाक बात यह है कि जब रंगे हाथों पकड़े गए, तो स्टाफ के पास बगलें झांकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
सोमवार को पालसोड़ा निवासी अनिल राठौर अपनी पत्नी के इलाज के लिए जीरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. आयुष चौहान ने मरीज की स्थिति को देखते हुए ब्लड और यूरिन टेस्ट (मूत्र जांच) कराने की सलाह दी। मरीज के परिजन करीब एक घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। लेकिन जब लैब के अंदर का नजारा दिखा, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। लैब स्टाफ ने यूरिन के सैंपल में जांच स्ट्रिप को डुबाना तक मुनासिब नहीं समझा। बिना किसी वैज्ञानिक जांच के, मनगढ़ंत तरीके से अंदर बैठे-बैठे ही टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर दी गई और मरीज के अटेंडर को सौंप दी गई।
मरीज के अटेंडर ने बिछाया जाल, कैमरे में कैद हुए फर्जी बाबू
अस्पताल के ढर्रे से वाकिफ अनिल राठौर को शायद पहले ही किसी गड़बड़ी की आशंका थी। इसलिए वे गुपचुप तरीके से मोबाइल से पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। जैसे ही बिना टेस्ट किए रिपोर्ट उनके हाथ में आई, अनिल ने सीधे लैब टेक्नीशियन और वहां मौजूद स्टाफ से तीखे सवाल दाग दिए। वीडियो में साफ दिख रहा है कि अपनी चोरी और जालसाजी पकड़े जाने पर लेबोरेटरी के तीनों स्टाफ के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। वे सवालों का जवाब देने के बजाय बगले झांकने लगे और कैमरे से बचते नजर आए।
जिम्मेदारों का रटा-रटाया जवाबरू मैं दिखवाता हूँ
इस बेहद गंभीर और आपराधिक लापरवाही के मामले में जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. विजय भारती को अवगत कराया गया और सबूत दिखाए गए, तो उन्होंने हमेशा की तरह एक ही रटा-रटाया सरकारी जुमला उगल दियाकृ ष्मामला संज्ञान में आया है, मैं दिखवाता हूँ।
बड़ा सवाल जनता के आक्रोश का इंतजार कर रहा है विभाग?
जीरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लापरवाहियों का यह कोई पहला मामला नहीं है। यहाँ मरीजों को इंसान नहीं, बल्कि जानवर समझकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। गलत रिपोर्ट के आधार पर अगर डॉक्टर कोई गलत दवा लिख देते, और मरीज की जान पर बन आती, तो उसका जिम्मेदार कौन होता? ऐसा लगता है कि जिला स्वास्थ्य विभाग किसी बड़े हादसे के इंतजार में सोया हुआ है। अगर समय रहते इस भ्रष्ट और लापरवाह ढर्रे को नहीं सुधारा गया, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग को जनता के भारी आक्रोश और उग्र आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। अब देखना यह है कि कैमरे पर कैद इस श्फर्जीवाड़ेश् के बाद दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।