अशोकनगर। प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत श्हर घर नल से जलश् देने के दावे भले ही कागजों में दम भर रहे हों, लेकिन अशोकनगर जिले के बीलाखेडा गांव की जमीनी हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है। इस गांव में दूसरों की प्यास बुझाने वाले कुएं आज खुद बूंद-बूंद पानी को प्यासे हो चुके हैं। भीषण जल संकट ने यहां के ग्रामीणों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
गांव के मुख्य कुओं की तलहटी में अब सिर्फ कीचड़, कचरा और चंद बूंदें ही बची हैं। सूख चुके कुओं में पानी-खींचने वाले पंप हवा में लटके हुए हैं, जो- आखिरी बूंदें खींचने की नाकाम कोशिश में जुटे हैं। कुएं में तैरते कचरे के डिब्बे और गंदा पानी यहां के हालातों की भयावहता साफ बयां कर रहे हैं।
सुबह चाय से नहीं, पानी की जंग से होती है शुरुआत बीलाखेडा में सुबह लोगों की दिनचर्या चाय-नाश्ते या मंदिर जाने से नहीं, बल्कि पानी की तलाश से शुरू होती है। आलम यह है कि रात होते ही ग्रामीण हाथ में टॉर्च लेकर सूखे कुओं पर पानी भरने के लिए पहुंच जाते हैं। घंटों के लंबे इंतजार के बाद बमुश्किल एक-एक लोटा पानी मिल पाता हैं, जिसे ग्रामीण किसी तरह सहेजकर घरों में रख रहे हैं।
जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में बीलाखेडा की मासूम बच्चियां कुएं के पाट पर रस्सी-बाल्टी डालकर पानी खींचने को मजबूर हैं। वहीं, पुरुष और महिलाएं तपती दोपहरी में सिर पर भारी-भरकम कैन रखकर सड़कों पर पानी ढोते नजर आते हैं। गांव के लगभग सभी हैंडपंप कबाड़ हो चुके हैं। किसी का हेड गायब है, किसी की असेंबली चोरी हो चुकी है, तो कहीं सिर्फ पेडेस्टल खड़े हैं। सक्षम ग्रामीण मोटरसाइकिल पर ड्रम बांधकर या ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में टंकियां रखकर 2 किमी दूर निजी बोरवेल से पानी ला रहे हैं, लेकिन गरीब और असहाय लोग पूरे दिन गांव के सूखे कुओं पर एक-एक -एक लोटा पानी के लिए आपस में संघर्ष करने को मजबूर हैं।
5 साल में सिर्फ पिलर ही खड़े हो पाए, कब मिलेगी राहत? बीलाखेडा गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण पिछले पांच साल से चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन पांच सालों में ठेकेदार और विभाग मिलकर केवल टंकी के पिलर ही खड़े कर पाए दूसरी तरफ, कागजी खानापूर्ति पूरी करने के लिए गांव में पाइपलाइन बिछ चुकी और हर घर में नल के कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, लेकिन इन नलों में आज तक पानी की एक बूंद नहीं टपकी। हैं।
पलायन की वेतावनी ग्रामीण सोनू अहिरवार, गेंदालाल, राजपाल अहिरवार, लालू, सुल्तान और रामरतन ने भास्कर को बताया कि यदि प्रशासन ने पानी के इंतजाम को लेकर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो ग्रामीणों के पास गांव से सामूहिक पलायन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
संबंध में जिम्मेदारों ने ये कहा
वाटर लेबल 500 से 600 फीट नीचे बीलाखेडा गांव में गर्मियों के समय में पानी की समस्या हो जाती है, है, वाटर लेबल 500 से 600 फीट नीचे चला जाता है, गांव में मंदिर के पास एक हैंडपंप चालू है ओर शिवराज के घर के पास मोटर चालू है, जिस पर लोग पानी भर लेते हैं, गांव में एक हैंडपंप पीएचई द्वारा लगाया जाना है, जहां वाटर लेवल पर्याप्त होगा वहीं लगाएंगे जिससे ग्रामीणों को पानी मिल सके, जल निगम वालों से भी हमारी बात हुई है, दिसम्बर तक पानी की टंकी का निर्माण पूरा करने को उन्होंने कहा है। - रोहित त्यागी, सब इंजीनियर, पीएचई, मुंगावली।