नीमच। जिले की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल मच गई, जब भाजपा शासित नगरपालिका परिषद के चार भाजपा पार्षदों ने ही परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जनसुनवाई में कलेक्टर को विस्तृत ज्ञापन सौंप दिया। विशेष बात यह रही कि नगरपालिका परिषद में भाजपा का बोर्ड है और अध्यक्ष भी भाजपा की ही हैं।
भाजपा पार्षद एवं नगरपालिका अपील समिति सदस्य एडवोकेट शशिकुमार कल्याणी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में योजना क्रमांक-18 स्थित भूखंड क्रमांक-15 के कथित अवैध नामांतरण, नियमविरुद्ध लीज नवीनीकरण तथा नगरपालिका की बहुमूल्य भूमि पर कब्जे के गंभीर आरोप लगाए गए।
पार्षदों का आरोप है कि वर्ष 1981-90 में विशेष उद्देश्य के लिए आवंटित भूखंड का बाद में नियमों के विपरीत उपयोग किया गया तथा बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए लीज नवीनीकरण और नामांतरण कर दिया गया। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2019 में लीज अनुबंध निरस्त होने के बावजूद अब तक नगरपालिका द्वारा भूमि का आधिपत्य नहीं लिया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
पार्षदों ने कथित फर्जी वसीयत, अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किए गए नामांतरण और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि जब संबंधित प्रकरण पूर्व में न्यायालय में नगरपालिका परिषद के पक्ष में निर्णित हो चुका है और लीज निरस्ती के आदेश भी जारी हो चुके हैं, तो अब तक कब्जा वापसी और दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
राजनीतिक दृष्टि से इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के ही पार्षदों ने खुलकर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
जनसुनवाई में पार्षदों ने मांग की कि करोड़ों रुपये मूल्य की उक्त नगरपालिका भूमि को तत्काल परिषद के आधिपत्य में लिया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।