नीमच। जिले में जायद फसलों के तहत किसानों द्वारा खरबूज और तरबूज की खेती को अपनाने से आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। उद्यानिकी विभाग के प्रोत्साहन और तकनीकी मार्गदर्शन से किसान पारंपरिक खेती के साथ नवाचार कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।
उप संचालक उद्यानिकी श्री अतरसिंह कन्नौजी ने बताया कि वर्ष 2024-25 में जिले में खरबूज का रकबा 700 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1200 हेक्टेयर हो गया है। वहीं, तरबूज की खेती भी 300 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है।
उन्होंने बताया कि गांधी सागर (रामपुरा) डूब क्षेत्र से जुड़े मनासा और जावद विकासखंड के किसानों को खरबूज-तरबूज की खेती के लिए प्रेरित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप किसान खरबूज एवं बीज-मगज की खेती से प्रति हेक्टेयर लगभग 4 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं।
जिले के लगभग 1125 किसान इस खेती से जुड़े हैं और जायद सीजन में उन्हें करीब 60 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होने का अनुमान है। उद्यानिकी विभाग किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी सलाह एवं विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराकर इस नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरबूज और तरबूज की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।