नीमच। जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में जिले में कुल 87,846 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है। इनमें मसाला फसलों का सर्वाधिक 53,374 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है।
उप संचालक उद्यानिकी अतर सिंह कन्नौजी ने बताया कि जिले में फल फसलें 10,022 हेक्टेयर, सब्जी फसलें 10,874 हेक्टेयर, मसाला फसलें 53,374 हेक्टेयर, औषधीय एवं सुगंधित फसलें 13,137 हेक्टेयर तथा पुष्प फसलें 439 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाई गई हैं।
ODOP योजना से उद्यमों को बढ़ावा-
एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत वर्ष 2020-21 से अब तक 297 इकाइयों की स्थापना के लिए 3,930.83 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है। इनमें 266 इकाइयों को 3,321.78 लाख रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। लाभार्थियों को कुल 1,366.95 लाख रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया है।
राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहे स्थानीय उत्पाद-
विश्वकर्मा हाईटेक कृषि फार्म, कस्तूरी, मालवा बाइट्स, स्पाइसी जायका, भगतजी मसाला, महारानी मसाला, अग्निपुष्प, अमृत कुंभ और गोपाल कृष्ण जैसे स्थानीय ब्रांड अमेजन, फ्लिपकार्ट सहित विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर के बाजारों तक पहुंच रहे हैं।
औषधीय फसलों का प्रमुख केंद्र बना नीमच-
जिला अश्वगंधा, ईसबगोल, तुलसी, कालमेघ, सफेद मूसली, शतावर, कलौंजी और चिया जैसी औषधीय फसलों की खेती के लिए विशेष पहचान बना चुका है।
संरक्षित खेती और भंडारण सुविधाओं का विस्तार-
जावद विकासखंड के रणावतखेड़ा को संरक्षित खेती क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है। यहां अब तक 1.63 लाख वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस स्थापित किए गए हैं। वहीं उद्यानिकी उत्पादों के सुरक्षित भंडारण के लिए जिले में 4 कोल्ड स्टोरेज, एक राइपनिंग चैंबर तथा 376 प्याज भंडार गृह निर्मित किए गए हैं।
सिंचाई सुविधाओं में बढ़ोतरी-
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 415 किसानों को 408.80 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर एवं पोर्टेबल सिंचाई संयंत्र लगाने के लिए अनुदान प्रदान किया गया है।