छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित और विस्थापन तथा मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे परिवारों की आवाज अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। लगातार चल रहे श्चिता आंदोलनश् और आमरण अनशन पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार से पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। पीएमओ के इस कदम के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों में न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
पीएमओ ने मांगी विरोध प्रदर्शनों की पूरी रिपोर्ट
प्रधानमंत्री कार्यालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रभावित परिवार आखिर किन कारणों से आंदोलन कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन मुआवजे से जुड़े विवादों, विस्थापन या किसी अन्य समस्या के कारण हो रहे हैं। केंद्र सरकार यह भी जानना चाहती है कि अब तक प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
मुआवजा वितरण में अनियमितताओं की शिकायत
पीएमओ को मिली शिकायतों में मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि बिचौलियों की भूमिका के कारण पात्र परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला, जबकि कई अपात्र लोगों को भी मुआवजा राशि का लाभ मिल गया।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने राज्य सरकार से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
अन्य परियोजनाओं पर भी मांगा जवाब
केवल केन-बेतवा लिंक परियोजना ही नहीं, बल्कि रुंझ, मझगांव और नैगुआ बांध परियोजनाओं तथा एनटीपीसी परियोजना से जुड़े मामलों पर भी पीएमओ ने जवाब तलब किया है।
रिपोर्ट में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर के आमरण अनशन का भी उल्लेख किया गया है।
प्रभावित परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप
विस्थापित परिवारों का आरोप है कि उन्हें उनकी जमीन और मकानों के बदले उचित मुआवजा नहीं मिला। उनका कहना है कि वास्तविक प्रभावितों की अनदेखी की गई, जबकि कई ऐसे लोगों को मुआवजा मिल गया जो इसके पात्र नहीं थे। प्रभावितों का कहना है कि इसी कारण वे लंबे समय से आंदोलन और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
च्डव् के हस्तक्षेप से बढ़ी उम्मीद
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, राज्य सरकार को केंद्र के सामने अपनी अब तक की कार्रवाई और आगे की योजना भी प्रस्तुत करनी होगी।
श्न्याय न मिलने तक आंदोलन जारी रहेगाश्
जय किसान संगठन के नेता और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मामले को गंभीरता से लेने से प्रभावित परिवारों में विश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस हस्तक्षेप के बाद भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी तथा सभी प्रभावित परिवारों को न्याय मिलेगा। उनका कहना है कि जब तक अंतिम प्रभावित व्यक्ति को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन और आमरण अनशन जारी रहेगा।