रतलाम। जिले में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मानसून मेहरबान हो गया। मंगलवार देर रात शुरू हुई बारिश का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। कहीं तेज तो कहीं रिमझिम बारिश ने खेतों में सूखने लगी सोयाबीन, मक्का सहित अन्य खरीफ फसलों को नई जिंदगी दे दी। बारिश से किसानों के चेहरों पर राहत और खुशी साफ नजर आई।
करीब पखवाड़ेभर तक बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलें गर्मी और नमी की कमी से प्रभावित होने लगी थीं। विशेष रूप से सोयाबीन की फसल क्रिटिकल स्टेज में होने के कारण किसान बेहद चिंतित थे। ऐसे समय पर हुई बारिश को कृषि विशेषज्ञ भी फसलों के लिए संजीवनी मान रहे हैं।
बुधवार को दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। कई स्थानों पर मूसलाधार बारिश भी दर्ज की गई। हालांकि इस बार अब तक जिले में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। 22 जुलाई तक रतलाम जिले में करीब 9 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 18.45 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। यानी इस बार अब तक लगभग 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिसका प्रमुख कारण अल-नीनो प्रभाव माना जा रहा है।
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार इस समय सोयाबीन की फसल सबसे महत्वपूर्ण अवस्था में है। ऐसे में समय पर हुई बारिश से फसलों को नमी मिलने के साथ दवा छिड़काव का भी बेहतर प्रभाव होगा। साथ ही किसानों का सिंचाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचेगा।
बारिश के लिए जिले के कई गांवों में लोगों ने धार्मिक आस्था के साथ इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए खेतों में दाल-बाटी-चूरमा का भोग लगाकर अच्छी वर्षा की कामना की। अब बारिश होने से किसानों की मेहनत रंग लाती नजर आ रही है।
फिलहाल जिले में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं तेज बारिश का दौर जारी है। यदि अगले दो-तीन दिनों तक मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो सोयाबीन और मक्का की फसलों को भरपूर लाभ मिलेगा और खरीफ उत्पादन को नई मजबूती मिलेगी।