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July 23, 2026, 5:02 pm
KHABAR : बाघ संरक्षण के लिए नौ दिवसीय अभियान, स्कूली बच्चों को बताया- अगर बाघ नहीं होंगे तो शाकाहारी जानवर बढ़कर फसलों को तबाह करेंगे, पढे़ खबर

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उमरिया। विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) के मौके पर नौ दिनों का खास जागरूकता अभियान शुरू हुआ है। इसका मकसद बच्चों और गांव वालों को बाघों, जंगलों और पर्यावरण को बचाने के प्रति जागरूक करना है।


इस अभियान के तहत 27 स्कूलों में पेंटिंग कॉम्पटीशन, चलती-फिरती प्रदर्शनी और ग्रामीणों के साथ बातचीत के कार्यक्रम रखे जा रहे हैं। बच्चे पेंटिंग के जरिए जंगलों और बाघों को बचाने का संदेश दे रहे हैं। वहीं श्टाइगर पाठशालाश् के जरिए बच्चों को बेहद आसान और मजेदार तरीके से समझाया जा रहा है कि जंगल का तंत्र कैसे काम करता है।


जंगल का संतुलन, जड़ी-बूटियां और बाघों की गिनती
बच्चों को बताया गया कि जंगल में बाघ और सांप जैसे जीवों का होना क्यों जरूरी है। अगर बाघ नहीं होंगे तो शाकाहारी जानवर बढ़कर फसलों को तबाह कर देंगे, और अगर सांप नहीं होंगे तो चूहे व मेंढक तबाही मचाएंगे।


इसके अलावा बच्चों को आंवला, हर्रा, बहेड़ा और सागौन जैसी काम की वनस्पतियों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, कैमरों और पंजों के निशानों (पगमार्क) से बाघों की गिनती कैसे होती है, यह भी सिखाया गया।


36 ईको विकास समितियों के जरिए ग्रामीणों से संवाद
जंगल से सटे गांवों में वन विभाग की टीमें लोगों को समझा रही हैं कि इंसान और जंगली जानवर साथ कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। गांव वालों से कहा गया है कि अगर कोई जंगली जानवर दिखे तो उसे तंग न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग को खबर करें।


क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय का बयान
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि इस पूरे अभियान के लिए 27 स्कूलों और 36 ईको विकास समितियों को चुना गया है। उन्होंने कहा कि बांधवगढ़ आने वाले ज्यादातर पर्यटक बाघ देखने ही आते हैं, इसलिए बाघों और उनके घर (जंगल) को बचाना बहुत जरूरी है। इसमें आम लोगों और गांव वालों की मदद सबसे ज्यादा मायने रखती है।

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