चित्तौड़गढ़। गर्भवती महिलाओं को बेहतर, सहज एवं सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महिला एवं बाल चिकित्सालय, चित्तौड़गढ़ में प्रसव सखी हेल्पडेस्क का शुभारंभ किया गया है। इस नई पहल के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय परामर्श, जांच, भर्ती एवं प्रसवोत्तर देखभाल तक प्रत्येक चरण में समग्र सहयोग प्रदान किया जाएगा। विशेष रूप से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में त्वरित एवं प्राथमिकता आधारित उपचार सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित होगी।
मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार एवं प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जयपुर द्वारा 21 जुलाई 2026 को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों की अनुपालना में महिला एवं बाल चिकित्सालय में 23 जुलाई 2026 से श्प्रसव सखी हेल्पडेस्कश् का संचालन प्रारंभ कर दिया गया है।
हेल्पडेस्क पर तैनात प्रसव सखी गर्भवती महिला को संबंधित चिकित्सक तक पहुंचाने, चिकित्सकीय परामर्श के अनुरूप आवश्यक जांचों के लिए मार्गदर्शन देने, प्रयोगशाला जांच एवं सोनोग्राफी में समन्वय स्थापित करने तथा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पुनः चिकित्सक तक पहुंचाने का कार्य करेगी। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया के दौरान भी प्रसव सखी द्वारा पूर्ण सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में संबंधित चिकित्सक एवं प्रभारी अधिकारी को तत्काल सूचना देकर प्राथमिकता के आधार पर उपचार सुनिश्चित कराया जाएगा। वहीं प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल एवं डिस्चार्ज प्रक्रिया के दौरान भी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें अस्पताल में बेहतर एवं सुगम स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
इस व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए प्रसव सखियों को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण शर्मा, उपनियंत्रक डॉ. मनीष वर्मा, नर्सिंग अधीक्षक नारायण लाल एवं हेल्थ मैनेजर विकास पारीक द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण उपरांत त्वरित कार्रवाई करते हुए हेल्पडेस्क का संचालन प्रारंभ कर दिया गया।
चिकित्सालय प्रशासन का मानना है कि इस पहल से विशेष रूप से हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, शीघ्र उपचार एवं गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। यह व्यवस्था मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।