सिवनी। हमने खून-पसीना एक करके और कर्ज लेकर फसल बोई थी कि पक्की नहर से पानी मिलेगा और इस बार पैदावार अच्छी होगी३ पर हमें क्या पता था कि भ्रष्टाचार की यह नहर हमारे सपनों को ही बहा ले जाएगी!’ यह दर्द है सिवनी के ढेकी गांव के उन किसानों की जिनकी फसलें सरकारी लापरवाही और घटिया निर्माण की भेंट चढ़ गई। किसानों की उम्मीदों और सिंचाई के सपनों को पूरा करने के लिए बनाई पक्की नहर पहली ही बारिश में बह गई। नहर का लगभग 20 फीट का हिस्सा टूटने से लाखों लीटर पानी खेतों में भर गया और देखते ही देखते अन्नदाता की मेहनत जलमग्न हो गई।
सिंचाई के नाम पर किसानों की भावनाओं से खिलवाड़?
ढेकी गांव के किसान इस बात से बेहद आहत हैं कि जिस नहर को उनके खेतों को हरा-भरा करने के लिए बनाया गया था वहीं आज उनकी तबाही का कारण बन गई। किसानों का आरोप है कि निर्माण के समय घटिया सीमेंट और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का खामियाजा आज किसान अपनी फसलें गंवाकर भुगत रहे हैं।
अन्नदाता की पुकार पर भी नहीं पसीजे अफसर!
बर्बादी के इस मंजर के बीच सबसे शर्मनाक बात अधिकारियों का रवैया रहा। अपनी डूबी फसलें देखकर बदहवास किसानों ने तुरंत पेंच व्यपवर्तन योजना के कार्यपालन यंत्री और अनुविभागीय अधिकारी को फोन लगाकर गुहार लगाई। घंटों बीत जाने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। आक्रोशित किसानों ने मांग की है कि कागजों में विकास दिखाने वाले अफसरों और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित किसानों को हुए भारी नुकसान का तत्काल मुआवजा दिया जाए।