भोपाल। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर थाने में हुई पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटना पर बालाघाट पुलिस अधीक्षक (एसपी) आदित्य मिश्रा ने बड़ा खुलासा किया है। एसपी के अनुसार, 15 सितंबर को हुई यह घटना पूरी तरह से प्रायोजित और एक सोचे-समझे षड्यंत्र का हिस्सा थी, जिसका मकसद सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं पर दोषारोपण करना था। पुलिस ने मामले में 63 नामजद समेत करीब 200 लोगों के खिलाफ बलवा और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब तक 26 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
उपद्रव से पहले गांव-गांव बांटी गई थी शराब
पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज से खुलासा हुआ है कि थाने में उपद्रव मचाने से पहले और बाद में हिर्री, मुर्री, पानगांव, छोटा पानगांव, टेडवा और माटे की दुकानों से भारी मात्रा में शराब खरीदकर बांटी गई थी। गिरफ्तार आरोपी ढाबा संचालक विकास कुमार डहाटे ने पूछताछ में स्वीकार किया कि स्वप्निल वराडे नाम के व्यक्ति ने ‘भाऊ’ के नाम पर माहौल बनाने के लिए उससे शराब की मांग की थी, जिसे आंवलाझरी और अन्य दुकानों से पिकअप वाहन के जरिए लाकर गांवों में बंटवाया गया। शराब की खरीद-फरोख्त के लिए PhonePe और UPI से भुगतान किया गया था।
FIR में नाम होने का मतलब आरोपी होना नहीं: एसपी
एसपी आदित्य मिश्रा ने स्पष्ट किया कि एफआईआर में नाम दर्ज होने मात्र से कोई दोषी साबित नहीं होता। निर्दोष लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है; जांच के बाद 67 लोगों को पूछताछ के बाद ‘बॉन्ड ऑफ गुड बिहेवियर’ भरवाकर उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया है। पुलिस के पास घटना के 1,000 से अधिक फुटेज उपलब्ध हैं, जिनसे आरोपियों की पहचान की जा रही है। उपद्रवियों की जानकारी देने वालों को पुलिस ने 10,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की है और सूचनादाता का नाम गोपनीय रखा जाएगा।
पूर्व सांसद पर ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर होगी कार्रवाई
मामले में पूर्व सांसद कंकर मुंजारे का नाम सामने आने पर एसपी ने कहा कि पुलिस उनके पुराने ट्रैक रिकॉर्ड और घटनास्थल पर उपस्थिति के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करेगी। यदि गिरफ्तारी होती है, तो उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।