छतरपुर। शहर में न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद निजी भूमि पर नाला निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है। मामला भूमि खसरा नंबर 1707 से जुड़ा है। भूमि स्वामी सेवानिवृत्त शिक्षक ब्रजेश त्रिपाठी का आरोप है कि तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड छतरपुर द्वारा 6 अगस्त 2022 को उनकी भूमि को लेकर स्थाई निषेधाज्ञा का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद नगरपालिका द्वारा उनकी करीब 10 फीट निजी भूमि पर नाला निर्माण के लिए जेसीबी से खुदाई कराई जा रही थी।
ब्रजेश त्रिपाठी के अनुसार, उन्होंने मौके पर मौजूद ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर को न्यायालय के आदेश की जानकारी देते हुए निर्माण कार्य रोकने की मांग की, लेकिन इसके बावजूद काम जारी रखा गया। उनका कहना है कि मुख्य मार्ग से लगी उनकी निजी भूमि पर जबरन नाला निर्माण कराया जा रहा है।
मामले की जानकारी मिलने पर मीडिया टीम मौके पर पहुंची और ठेकेदार व संबंधित इंजीनियर से निर्माण को लेकर सवाल किए। इसके बाद मौके पर काम रोक दिया गया और संबंधित लोग वहां से चले गए।
भूमि स्वामी का कहना है कि मौके पर पहले से पुरानी नाली बनी हुई है। यदि पुरानी नाली क्षतिग्रस्त हो गई है तो उसी स्थान पर नई नाली का निर्माण कराया जाना चाहिए, निजी भूमि पर नहीं।
मामले में नगरपालिका के इंजीनियर महेंद्र पटेल ने मौके पर जांच-पड़ताल करने की बात कही है। वहीं, मुख्य नगरपालिका अधिकारी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। अब पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद निजी भूमि पर नाला निर्माण का कार्य किसके निर्देश पर शुरू कराया गया।