मनासा। तहसील के ग्राम भाटखेड़ी निवासी किसान विनोद पाटीदार पिछले दो वर्षों से जैविक खेती को अपनाकर कृषि क्षेत्र में नवाचार कर रहे हैं। उन्होंने खेत पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और पशुपालन को कृषि से जोड़ते हुए खेती की लागत कम करने के साथ आय बढ़ाने का मॉडल विकसित किया है।
पाटीदार के पास पांच गिर गाय, दो मुर्रा नस्ल की भैंस और पांच एचएफ गाय हैं। पशुओं से प्राप्त गोबर एवं गोमूत्र का उपयोग वे जैविक खाद और विभिन्न जैविक कृषि आदान तैयार करने में करते हैं। इनका उपयोग खेत में करने से रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम हुई है, जिससे खेती की लागत में कमी आई है।
योजनाओं से मिला प्रोत्साहन और मार्गदर्शन-
पाटीदार बताते हैं कि उन्हें परंपरागत कृषि विकास योजना सहित शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और योजनाओं से उन्हें जैविक खेती अपनाने तथा इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला। वे स्वयं वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य जैविक कृषि आदानों का निर्माण कर उनका व्यवसाय भी कर रहे हैं।
जैविक गतिविधियों से 3 लाख की आय, अब 10 लाख का लक्ष्य-
पाटीदार के अनुसार, पिछले वर्ष जैविक कृषि गतिविधियों से उन्हें लगभग 3 लाख रुपये की आय हुई। जैविक खेती एवं इससे जुड़ी गतिविधियों का विस्तार करते हुए उन्होंने चालू वर्ष में 10 लाख रुपये की आय का लक्ष्य निर्धारित किया है।
कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से उन्होंने खेत पर मधुमक्खी पालन के पांच बॉक्स भी स्थापित किए हैं। उनके अनुसार, मधुमक्खियों से परागण बढ़ने से फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से खेती बनी टिकाऊ-
विनोद पाटीदार का कहना है कि जैविक खेती कम लागत में बेहतर एवं टिकाऊ कृषि का प्रभावी माध्यम है। पशुपालन से प्राप्त संसाधनों का खेत में उपयोग करने से कृषि लागत कम होने के साथ अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़े हैं।
जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली शासन की योजनाओं एवं कृषि विभाग से मिले मार्गदर्शन के लिए पाटीदार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।