कसरावद (भीलगांव)। कई पीढ़ियों से गांव में निवास, घर भी अपने और जीवन भी इसी मिट्टी से जुड़ा, लेकिन इसके बावजूद आवासीय जमीन के वैध पट्टों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। ग्राम पंचायत भीलगांव के ग्रामीणों ने मंगलवार, 3 नवंबर को एकजुट होकर तहसीलदार कसरावद के नाम सामूहिक ज्ञापन सौंपा और गांव को राजस्व अभिलेखों में आबादी क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वज दशकों से भीलगांव में निवास करते आ रहे हैं। पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन कई परिवारों को आज तक अपने आवासीय भूखंडों के वैध दस्तावेज और पट्टे नहीं मिल पाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पुराने समय में शिक्षा और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी के अभाव में कई परिवारों के पट्टे तैयार नहीं हो सके।
गांव में सुविधाएं, फिर भी पट्टों का इंतजार
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सड़क सहित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं और कई परिवारों को सरकारी आवास योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में गांव को विधिवत आबादी क्षेत्र के रूप में दर्ज नहीं किए जाने से आवासीय जमीन के दस्तावेजों की समस्या बनी हुई है।
ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव का राजस्व विभाग के माध्यम से सर्वे और भौतिक सत्यापन कराने, वास्तविक आवासीय स्थिति का परीक्षण करने तथा नियमानुसार भीलगांव को आबादी क्षेत्र में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की। साथ ही वर्षों से निवासरत पात्र परिवारों के आवासीय भूखंडों का परीक्षण कर वैध पट्टे जारी करने की मांग भी उठाई।
महिलाओं और बुजुर्गों ने भी संभाला मोर्चा
ज्ञापन सौंपने के दौरान जयस कसरावद तहसील अध्यक्ष अरविन्द भूरिया, ग्राम भीलगांव अध्यक्ष प्रवीण मोहिने, उपसरपंच कमलेश माथुर, विशाल गुंडिया, कृष्णा निगवाल, गजानंद खराड़े, धर्मेंद्र भूरिया, विजय मेडा, अजय मोरे, धर्मेंद्र रावत, गणेश माथुर एवं करण आड़तीया सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।
वहीं बुजुर्ग बसू बिलवाल, फथु नाथ, देवेसिंह बारिया सहित बुड़ी बाई, विद्या बाई, जानकी बाई, पारु बाई, मधुसूदन बाई और गजरी बाई ने भी ज्ञापन के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव के आवासीय अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी है। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि सर्वे और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद इस वर्षों पुरानी समस्या के समाधान के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।