शुजालपुर मंडी। अवैध रूप से एडवायजरी ऑफिस संचालित कर फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल नंबरों के माध्यम से लोगों से धोखाधड़ी करने के मामले में शुजालपुर मंडी पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लोगों को फोन कर उन्हें निवेश के लिए प्रेरित करते थे। मामले में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बारकोड और लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
बंधक बैंक के पास मकान में चल रहा था ऑफिस-
पुलिस के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बंधन बैंक के पास जैन मंदिर रोड स्थित ऋषि जायसवाल के मकान में अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सूचना की तस्दीक के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहां एक कमरे में कुछ युवक और युवतियां मोबाइल फोन पर बातचीत करते मिले। पुलिस को देखकर तीन युवक अपने मोबाइल फोन छिपाने का प्रयास करने लगे।
पूछताछ में उन्होंने अपने नाम ऋषि पिता रमेशचंद्र जायसवाल (35), निवासी बंधन बैंक के पास जैन मंदिर रोड, शुजालपुर मंडी; रोहन पिता भगवान सिंह परमार (22), निवासी नांदासुरा तथा अभिषेक पिता दिनेश मेवाड़ा (23), निवासी रानी बड़ोद, थाना अकोदिया बताए।
शेयर बाजार में निवेश के नाम पर करते थे फोन-
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में ऋषि जायसवाल ने खुद को ऑफिस का संचालक तथा रोहन परमार और अभिषेक मेवाड़ा को मैनेजर बताया। ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों के बयान में सामने आया कि वे वेतन के आधार पर वहां काम करते थे।
कर्मचारियों को आरोपियों की ओर से मोबाइल नंबरों की सूची उपलब्ध कराई जाती थी। इन नंबरों पर फोन कर लोगों को शेयर बाजार में निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था। निवेश पर होने वाले लाभ का 30 प्रतिशत कमीशन ऑफिस में देने की बात कही जाती थी। ग्राहकों से रुपये जमा कराने के लिए कर्मचारियों को बारकोड दिए जाते थे, जिन्हें वे ग्राहकों के साथ साझा करते थे।
पुलिस के अनुसार, कर्मचारियों को फोन करने के लिए मोबाइल और सिम कार्ड भी ऋषि जायसवाल उपलब्ध कराता था। इन सिम कार्डों के वास्तविक धारकों की जानकारी कर्मचारियों को नहीं दी जाती थी।
रजिस्टर में मिला मोबाइल नंबरों और लेन-देन का हिसाब-
पुलिस ने मौके से मोबाइल फोन और अन्य सामग्री जब्त कर उनकी जांच की। इस दौरान विभिन्न बारकोड मिले। जब्त रजिस्टर में मोबाइल नंबरों की सूची, रुपये के लेन-देन, लाभ और हानि का हिसाब दर्ज पाया गया। मौके पर ऑफिस संचालन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले।
पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया बिना वैध दस्तावेजों के एडवायजरी ऑफिस संचालित कर मोबाइल और सिम कार्ड का दुरुपयोग करते हुए लोगों से धोखाधड़ी कर अवैध लाभ अर्जित करने का मामला सामने आया है।
बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज-
मामले में ऋषि जायसवाल, रोहन परमार और अभिषेक मेवाड़ा के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई है।
बैंक खातों और सिम कार्ड धारकों की जांच जारी-
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड किन व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत हैं और ग्राहकों को भेजे गए बारकोड किन बैंक खातों से जुड़े हैं। पुलिस को मामले में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता की भी आशंका है। अज्ञात बैंक खातों में बड़ी मात्रा में लेन-देन होने की संभावना को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है।
कार्रवाई में इनकी रही भूमिका-
इस कार्रवाई में निरीक्षक शिवकुमार यादव, थाना प्रभारी शुजालपुर मंडी, उपनिरीक्षक तेजप्रकाश बोहरे, सहायक उपनिरीक्षक गुलाबचन्द रायकर, प्रधान आरक्षक 158 आशीष वर्मा, प्रधान आरक्षक 223 बलराम यादव, आरक्षक 564 संजय परमार, आरक्षक 100 वीरेन्द्र सिंह, आरक्षक 121 मांगीलाल, आरक्षक 106 संदीप यादव, आरक्षक 177 रविकांत यादव, आरक्षक 176 अनिल यादव एवं महिला आरक्षक 479 अंजु तोमर की सराहनीय भूमिका रही।