भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में नई सरकारी गाड़ियों को लेकर मामला चर्चा में है। सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दो मंत्रियों और गृह सचिव के लिए नई कारें खरीदी हैं, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल के नई गाड़ियों के प्रस्ताव वित्त विभाग ने लौटा दिए हैं। विभाग ने वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए पुरानी गाड़ियों की मरम्मत कराकर इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं।
बताया गया है कि दोनों उपमुख्यमंत्रियों के सरकारी वाहन निर्धारित सीमा से अधिक चल चुके हैं। नियमानुसार, सरकारी वाहन के 1 लाख 10 हजार किलोमीटर चलने पर उसे बदलने का प्रावधान है। इसके बावजूद गृह विभाग के माध्यम से भेजे गए दोनों उपमुख्यमंत्रियों के नई कार खरीदने के प्रस्तावों को वित्त विभाग की मंजूरी नहीं मिली।
CM, दो मंत्रियों और गृह सचिव को मिली नई कारें
इस साल सरकार ने चार नई कारें खरीदी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए एक ईवीएक्स 9 कार खरीदी गई, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और गृह सचिव कृष्णा वेणी के लिए इनोवा क्रिस्टा खरीदी गईं। ऐसे में दो मंत्रियों और एक वरिष्ठ अधिकारी को नई गाड़ी मिल गई, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्रियों के प्रस्ताव अटक गए।
खर्चों पर नियंत्रण के निर्देश, फिर भी खरीदी गईं गाड़ियां
करीब तीन महीने पहले प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकार ने खर्चों पर नियंत्रण के निर्देश जारी किए थे। अधिकारियों के विदेश दौरों, महंगे होटलों में बैठकें और अन्य खर्चों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। सामान्य प्रशासन विभाग ने यथासंभव वर्चुअल बैठकें करने और जिलों के अधिकारियों को भोपाल नहीं बुलाने के निर्देश भी दिए थे।
इसके अलावा मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या कम करने को कहा गया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाकर सात रखने का निर्णय लिया था। इन निर्देशों के बावजूद इसी साल कई नई कारें खरीदी गईं, जबकि दोनों उपमुख्यमंत्रियों को नई गाड़ियों की अनुमति नहीं मिली।
सप्लीमेंट्री बजट में वाहन खरीद के प्रस्तावों पर रोक
वित्त विभाग ने दिसंबर में होने वाले शीतकालीन सत्र के लिए चालू वित्त वर्ष के दूसरे अनुपूरक बजट के प्रस्ताव 22 अक्टूबर तक ऑनलाइन भेजने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे नए मदों के प्रस्ताव शामिल नहीं किए जा सकेंगे, जिनसे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। साथ ही वाहन खरीद के प्रस्तावों को अनुपूरक बजट में शामिल नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ऐसे में दोनों उपमुख्यमंत्रियों की नई कारों की मांग पर फिलहाल मंजूरी नहीं मिल सकी है और उन्हें मौजूदा वाहनों की मरम्मत कराकर चलाने को कहा गया है।