नीमच। मालवा-मेवाड़ के अफीम किसानों की नजरें अब सरकार की अफीम नीति पर टिकी हैं। नीति जारी होने में हो रही देरी को लेकर किसानों और व्यापारियों की चिंताएं सामने आने लगी हैं। कहीं कम बारिश और बदलते मौसम को लेकर चिंता है, तो कहीं अफीम की बुवाई, उत्पादन और पोस्तादाना के भाव पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर वॉइस ऑफ एमपी की टीम ने किसानों और व्यापारियों से चर्चा की, जिसमें कई लोगों ने जल्द से जल्द अफीम नीति घोषित करने की मांग की। वहीं, कुछ व्यापारियों का मानना है कि नीति में देरी से ज्यादा असर इस बात का पड़ेगा कि इस बार कितने किसानों को पट्टे मिलते हैं।
नीति में देरी से मौसम की चुनौती बढ़ने की आशंका-
किसान ललित बाफना ने कहा कि अफीम नीति जारी होने में देरी से किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। किसानों को बदलते मौसम का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सांसद सीपी जोशी ने काश्तकारों से पट्टे बोने की बात कही है, लेकिन नीति और नियमों को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
किसान प्रेमप्रकाश पाटीदार ने नीति में हो रही देरी को सरकार की नाकामी बताते हुए कहा कि इस साल पहले ही पानी की कमी की स्थिति है। इसके बावजूद अब तक नीति जारी नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से जल्द नीति घोषित करने की मांग की। साथ ही कहा कि किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर भी परेशानी हो रही है।
व्यापारियों की राय- पट्टे कम हुए तो बढ़ सकते हैं पोस्तादाना के भाव
व्यापारी प्रतिनिधि नवल मित्तल ने कहा कि अफीम नीति जारी होना तय है और केवल देरी से कारोबार पर कितना असर पड़ेगा, यह कहना मुश्किल है। हालांकि, यदि इस बार अफीम के पट्टों की संख्या कम होती है, तो इसका असर बाजार में दिखाई दे सकता है। उनके अनुसार, पट्टे कम होने पर पोस्तादाना के भाव बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि किसान परिस्थितियों के अनुसार अफीम की खेती करने का प्रयास करते हैं।
किसान परमानंद ने भी चिंता जताते हुए कहा कि इस बार बारिश कम हुई है और अब तक अफीम नीति जारी नहीं हुई है। यदि नीति जल्द घोषित नहीं होती है, तो इसका असर खेती और उत्पादन पर पड़ सकता है।
व्यापारी महावीर दक ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस बार अफीम नीति जारी होने में करीब डेढ़ महीने की देरी हो चुकी है। यदि अब भी जल्द घोषणा नहीं होती है, तो काश्तकारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
बुवाई को लेकर असमंजस, उत्पादन घटने की आशंका-
किसान विक्रम पाटीदार ने कहा कि नीति जारी होने से पहले अफीम की बुवाई करने पर किसानों को अधिकारियों की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इस साल बारिश की कमी और मौसम में संभावित बदलाव को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, परिस्थितियां प्रतिकूल रहीं तो किसानों को उत्पादन में 30 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका है।
किसान रविंद्र नाथ गेहलोत ने अफीम नीति में हो रही देरी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर नीति मिलनी चाहिए, ताकि वे आगे की तैयारी कर सकें। उन्होंने केंद्र सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की।
किसान भेरूलाल ने कहा कि नीति में देरी से किसान असमंजस में हैं। उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इस बार सीपीएस व्यवस्था के तहत पट्टे मिलेंगे या लुनी-चिरनी पद्धति के तहत। उन्होंने सरकार से जल्द नीति घोषित कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
व्यापारियों ने भी जल्द नीति जारी करने की उठाई मांग-
व्यापारी मनोहर लाल बंब ने कहा कि सरकार को किसानों के हित में जल्द से जल्द अफीम नीति घोषित करनी चाहिए। उनके अनुसार, नीति जारी होने में और देरी हुई तो बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के कारण भी किसान पहले से परेशान हैं।
व्यापारी कैलाश ने भी माना कि नीति में देरी का असर काश्तकारों पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, देरी और इस साल बारिश की कमी के चलते अफीम उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर आगे चलकर पोस्तादाना के बाजार भाव पर भी दिखाई दे सकता है।
अब सरकार की घोषणा पर टिकी निगाहें-
अफीम नीति में देरी को लेकर किसानों और व्यापारियों की चिंताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार नीति कब जारी करेगी और इस बार पट्टों को लेकर क्या व्यवस्था रहेगी। किसानों को बुवाई की तैयारी, मौसम और खाद जैसी समस्याओं के बीच स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार है। वहीं, व्यापारियों की नजरें पट्टों की संख्या और उसके बाजार पर पड़ने वाले संभावित असर पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि सरकार कब अफीम नीति जारी कर किसानों के असमंजस को दूर करती है।