जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लगातार नवाचार और परिणाम आधारित प्रयास किए जा रहे हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव के दिशा-निर्देशन एवं प्रभावी मॉनिटरिंग में ‘राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान’ और ‘स्टार टीचर’ पहल के माध्यम से सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इन प्रयासों के बीच प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पांच साल बाद नामांकन में वृद्धि दर्ज की गई है।
15 शिक्षकों को मिला ‘स्टार टीचर’ सम्मान-
सरकारी विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक परिणाम देने और नवाचारी शिक्षण पद्धतियां अपनाने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने अक्टूबर माह में ‘स्टार टीचर’ पहल शुरू की है। इसके तहत 26 अक्टूबर को जारी पहली सूची में प्रदेश के आठ सरकारी विद्यालयों के 15 शिक्षकों को राजस्थान के पहले ‘स्टार टीचर’ के रूप में चयनित किया गया।
चयन के लिए दो प्रमुख आधार तय किए गए। मार्च 2026 के कॉम्पिटेंसी बेस्ड असेसमेंट (CBA) परिणामों के आधार पर 11 शिक्षकों का चयन किया गया, जबकि कक्षा में कठिन विषयों को सरलता से समझाने, शैक्षणिक खेलों और शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) के रचनात्मक उपयोग से जुड़े वीडियो के मूल्यांकन के आधार पर चार शिक्षकों को चुना गया। चयनित शिक्षकों को शिक्षक ऐप पर डिजिटल प्रमाण पत्र दिए गए हैं और उनकी सूची शाला दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। यह चयन प्रक्रिया अब हर माह जारी रहेगी।
राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान से हर बच्चे को जोड़ने का प्रयास-
शिक्षा से वंचित बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान’ दो चरणों में संचालित किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक प्रधानाचार्य एक शिक्षक को एक बच्चे की जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। संबंधित शिक्षक बच्चे के परिवार से संपर्क कर उसका विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।
अभियान की निगरानी शाला दर्पण पोर्टल और डैशबोर्ड के माध्यम से की जा रही है। इसके लिए सीबीईओ स्तर पर प्रत्येक 15 दिन में समीक्षा, सीडीईओ द्वारा प्रगति की निगरानी और जिला कलेक्टर द्वारा मासिक समीक्षा की व्यवस्था की गई है। अभियान में बालिकाओं, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, प्रवासी, बाल श्रमिक, आदिवासी और घुमंतू समुदाय के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पांच साल बाद नामांकन में 48 हजार से अधिक की वृद्धि-
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 तक प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में कुल नामांकन बढ़कर 72,98,854 हो गया है। यह वर्ष 2025-26 के कुल नामांकन 72,50,496 की तुलना में 48,358 अधिक है।
कुल नामांकन में 38,92,355 बालिकाएं यानी 53.3 प्रतिशत और 34,06,486 बालक यानी 46.7 प्रतिशत हैं। विभाग के अनुसार सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं का नामांकन बालकों से लगभग 4.86 लाख अधिक है। वर्तमान में प्रत्येक 1,000 बालकों पर 1,143 बालिकाएं नामांकित हैं।
जिलेवार आंकड़ों में बांसवाड़ा में 11,939, उदयपुर में 9,448, बाड़मेर में 5,937, जालोर में 5,485 और सिरोही में 4,295 की नामांकन वृद्धि दर्ज की गई है। जिन जिलों में नामांकन में कमी आई है, वहां ड्रॉपआउट रोकने के लिए विशेष समीक्षा की जा रही है।
विभाग का मानना है कि शिक्षकों को प्रोत्साहन देने और शिक्षा से वंचित बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने की ये पहलें प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और परिणामोन्मुखी बनाने में मददगार साबित होंगी।