नीमच। नगर पालिका परिषद् के गठन के बाद से घमासान जारी है और सीएमओ के ट्रांसफर वाला मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सीएमओ मैडम कैम्प की तरफ से दो दिन पूर्व जो ट्रम्प कार्ड चला गया। उसकी गूंज भोपाल तक हो गयी है और बताते हैं की अब यह पूरा मामला सीएम सेक्रेटेरिएट के संज्ञान में आ गया है। भोपाल में इस बात को स्टेब्लिश करने की कोशिश की गयी है कि मैडम पाटीदार भूमाफियाओं के खिलाफ यलगार करने निकली तो नपाध्यक्ष सहित पूरी भाजपा उनके खिलाफ हो गयी और उन्हें हटाने की कवायद कर डाली। कुलमिलाकर कहानी ये बनाई गयी है कि भाजपा के कुछ पार्षद अरबों रूपए की शासकीय भूमि को निपटाना चाहते हैं और मैडम उसे बचाना चाहती है।
आज प्रदेश के लीडिंग न्यूज़ पेपर दैनिक भास्कर में सवा सौ करोड़ रूपए मूल्य की सिंधी कॉलोनी स्थित भूमि को लेकर की गयी रिपोर्टिंग में कहा गया है कि भाजपा से जुड़े पार्षद इस भूमि को ओने पौने दामों पर खरीद चुके है और अब इसमें अपने मुआफ़िक वकील की नियुक्ति करवाकर कोर्ट से इस मामले में फैसला अपने हक़ में करवाना चाहते है, जब सीएमओ मैडम ने उनका काम नहीं किया तो उनका तबादला करवा दिया और जब उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया तो अब विशेष सम्मलेन बुलवाकर उन्हें हटाना चाहते हैं।
इस मुद्दे को सीएमओ मैडम कैम्प का ट्रंप कार्ड माना जा रहा है। इस मामले की गूंज भोपाल तक पहुंची है और समूची भाजपाई परिषद् और नपाध्यक्ष कटघरे में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
जैसा की हमने कल के ई अखबार में लिखा था छद्म मुद्दों के आसरे नगर पालिका का तांगा यूं ही चलता रहेगा, आम जनता कभी बेरिकेटिंग तो कभी भाजपा - कांग्रेस की नूरा कुश्ती में या फिर सीएमओ के तबादले की कहानियों में उलझी रहेगी, परदे के पीछे वो तमाम काम होंगे जो होने के है, जैसा हमने पूर्व की रिपोर्टिंग्स में लिखा था की नेता अपनी जेब में दो एजेंडे लेकर घूमते हैं एक तो वो मुद्दे जिन पर बोला जाता है और एक वो जो हिडन एजेंडा होता है जिस पर बोला नहीं जाता जिसको अमलीजामा पहनाया जाता है।
डबल इंजिन की सरकार में अपनी ही पार्टी की बहुमत वाली नगर पालिका में सीएमओ के तबादले का तमाशा यही सब कहता है और फिर पिछले दो दिन में सीएमओ कैम्प ने जो ट्रम्प कार्ड चला है। एक बात पुख्ता हो गयी है कि परदे के पीछे ज्ञान बांटने वाला कोई मामूली आदमी नहीं जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि विधायक नीमच दिलीप बापू की चिट्ठी पर एपीएस गहरवार का तबादला आदेश निकलने के बाद शासन में बैठे मैडम कैम्प के आकाओ ने सोची समझी रणनीति के तहत मैडम की पोस्टिंग का आदेश नहीं निकलने दिया, ताकि उन्हें कोर्ट से आसानी से स्टे मिल सके और वो पूरी तरह स्वतंत्र होकर वो काम कर सके, जो काम करने के हैं।
कितनी हास्यास्पद बात है कि निकाय चुनाव के दौरान भाजपा के तमाम दिग्गजों ने आम शहरी से जुडी समस्याओं को चुटकी बजाकर हल करने का दावा किया था, लेकिन आज उन मुद्दों पर बात तक नहीं हो रही है और न ही इन नेताओ को वो मुद्दे याद होंगे। ठीक 11 महीने बाद फिर चुनाव होने हैं। विधानसभा के उस समय ये तमाम नेता फिर आएंगे चूँकि चुनाव बड़ा है। यदि हिंदुत्व के मुद्दे पर हुआ तो जनता से जुड़े तमाम मुद्दे बेमानी है और यदि काम के आकलन के आधार पर वोट पड़े तो ये नेता फिर दिलासा का झुनझुना पकड़ा कर चुनाव जीत जाएंगे। जनता एक बार फिर ठगी रह जायेगी जैसे अभी ठगी महसूस कर रही है।