रतलाम। करीब डेढ साल पहले नेपाल से भटक कर रतलाम पहुंची सौलह वर्षीय बालिका को बाल कल्याण समिति न्यायपीठ के लगातार प्रयासों के बाद नेपाल में उसके परिजनों के पास भेजने में सफलता प्राप्त हुई है। बाल कल्याण समिति को नेपाली बालिका को फिर से उसके परिजनों के पास भिजवाने के लिए कई जटिल प्रक्रियाओं को पूरा करना पडा।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुधीर निगम ने बताया कि विगत 1 जुलाई 2021 को एक सौलह वर्षीय बालिका चांदनी (परिवर्तित नाम) रेलवे चाइल्ड लाइन ने बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया था। यह बालिका रेलवे चाइल्ड लाइन को उत्तर प्रदेश से रतलाम आई एक ट्रेन में मिली थी। बाल कल्याण समिति ने चांदनी को अस्थाई निवास हेतु बालिका गृह में रखने हेतु आदेशित किया था।
बालिका गृह में चांदनी से जानकारी लेने पर पता चला कि वह मूल रुप से नेपाल की रहने वाली है और अपने परिजनों के साथ मजदूरी करने उत्तर प्रदेश में आई थी। उत्तर प्रदेश में किसी गलत ट्रेन में बैठ गई और रतलाम आ पंहुची। चांदनी से उक्त जानकारियां मिलने पर बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुधीर निगम ने चांदनी को नेपाल पंहुचाने के लिए प्रयास प्रांरभ किए।
चांदनी का स्थाई निवास नेपाल का होने से किशोर न्याय अधिनियम 2015 के(आदर्श नियम 2016) के नियम 81 (5) के अनुसार बालिका के प्रत्यावर्तन के संबंध में भारत सरकार के ग्रह मंत्रालय और विदेश विभाग की अनुमति आवश्यक होने से जिला बाल संरक्षण अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग रतलाम को पत्र जारी किया गया था ताकि बालिका को अपने घर पंहुचाया जा सके।
बल कल्याण समिति के प्रयासों के बाद दिनाक 08दिसम्बर को पत्र के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि बालिका का प्रत्यावर्तन करने हेतु केन इंडिया के प्रतिनिधि को अधिकृत किया गया है। चांदनी को केन इंडिया के प्रतिनिधि नविन जोशी और लक्ष्मी खाड़का को हैंडओवर किया जाना है। यह पत्र प्राप्त होने के बाद चांदनी को आज 22दिसम्बर को बाल कल्याण समिति रतलाम द्वारा केन इंडिया के प्रतिनिधि नवीन जोशी और लक्ष्मी खाड़का के मार्गरक्षण में देने का आदेश किया गया। उक्त दोनों प्रतिनिधि चांदनी को लेकर पहले दिल्ली जायेंगे वहां से नेपाल सरकार के माध्यम चांदनी के घर माता-पिता को सुपुर्द करेंगे।