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December 22, 2022, 8:23 pm
BIG NEWS : बेकसूर अफीम किसान और अमित शाह की दो टूक, पढ़े जर्नलिस्ट मुस्तफा हुसैन की ये ख़ास खबर

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नीमच। बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने वक्तव्य में कहा कि देश के 472 जिलों में मैपिंग कर ड्रग्स की आपूर्ति के मार्गों की पहचान की गयी है। वहीं इस साल करीब 1 लाख 60 किलो जप्त ड्रग्स जलाकर सरकार ने नष्ट करवाया है। 

लोकसभा में दिया गया गृहमंत्री का यह स्पीच कई मायनों में महत्वपूर्ण है क्योकि देश में कुल 766 जिले हैं, उसमें से 472 जिले यानी आधे से काफी अधिक जिले ड्रग्स की आवाजाही को लेकर चिन्हित किये गए हैं यह एक दिल दहलाने वाली सच्चाई है। इससे साफ़ होता है कि ड्रग्स का कारोबार देश में कैसे अपने पांव पसार चुका है।

केंद्रीय गृहमंत्री का वक्तव्य इस मायने में भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि आमतौर पर अफीम की वैध खेती करने वाले किसानों को तस्कर ठहराया जाता रहा है और इन्हीं अफीम की वैध खेती वाले इलाको में एजेंसिया छोटे मोटे केस बनाकर खुद की पीठ थपथपाती रही है, जबकि देश में इतने बड़े पैमाने पर सिंथेटिक ड्रग का जानलेवा कारोबार अपने पांव जमा चुका है। 

वॉइस ऑफ़ एमपी ने हमेशा से ही इस बात को कहा है कि देश के सामने इस समय बड़ा खतरा सिंथेटिक ड्रग्स का है। वहीं हमने इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया कि अफीम की लाइसेंसी खेती जिन राज्यों में होती है वो देश में हो रही अफीम की अवैध खेती के सामने ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। देश के कम से कम 8 राज्य अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, आसाम, नागालैंड, मणिपुर, झारखंड, कश्मीर और पश्चिम बंगाल ऐसे हैं जहां बड़े पैमाने पर अवैध अफीम उगाई जाती है और यह बात केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की अरुणाचल प्रदेश में हुयी कार्रवाही से भी साबित हो गई, जब सीबीएन ने 14 हज़ार बीघा में लगाईं गयी अवैध खेती नष्ट की थी। 

केंद्रीय गृहमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया की पूरे देश में नीचे तक नशा मुक्ति अभियान और नशे के खिलाफ अवेयरनेस प्रोग्रेम चलाने की ज़रूरत है। बुधवार को लोकसभा में दिए अपने भाषण में अमित शाह ने देश में फैले ड्रग्स के कारोबार पर अपनी बात रखते हुए यह भी कहा कि देश में हुई इंटरपोल की महासभा में इस विषय को उठाया गया, जिसमें मादक पदार्थ और इससे प्राप्त धन से आतंकवाद पर भी चर्चा की गई। उन्होंने इस बात को भी स्वीकारा की पाकिस्तान से अभी कोई कारोबार नहीं हो रहा है, ऐसे में सरहद से होकर नशीले पदार्थ नहीं आते हैं, लेकिन वहां से ड्रोन से और सुरंग बनाकर ड्रग्स भेजा जाता है। वहीं बदंरगाहों के रास्ते भी यह कारोबार होता है 

केंद्रीय गृहमंत्री के लोकसभा में दिए बयान से साफ़ है कि देश को अफीम उत्पादक अंचलों में हो रही अफीम की वैध खेती से कोई ख़तरा नहीं। जबकि आमतौर पर जब भी नए पट्टे जारी करने या अफीम किसानों को राहत देने की बात आती है तो किसान को तस्कर ठहराकर तमाम मांगों को खारिज कर दिया जाता है। जबकि किसानों द्वारा उपजाई जा रही अफीम का इस्तेमाल देश की 50 हज़ार दवा कम्पनियां जीवन रक्षक दवाये बनाने में करती है और इन दवाओं से वो अकूत धन कमाती है, जिसका मुनाफ़ा किसानों की जगह इन दवा कम्पनियों की जेब में जाता है और किसान जैसे ही इस मुद्दे पर बोलने की कोशिश करता है उसे तस्कर कह कर उसका मुंह बंद कर दिया जाता है।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह का लोकसभा में दिया बयान बड़े खतरे को साफ़ इंगित कर रहा है, क्योकि सिंथेटिक ड्रग्स से देश की नौजवान पीढ़ी बर्बाद हो रही है। इस बयान से ये तो जाहिर है की सरकार के कान अब खड़े हो गए है और सरकार ड्रग माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने के मूड में है। गृहमंत्री शाह ने लोकसभा में दो टूक कहा कि जो नये-नये तरीके खोजे जाते हैं उनसे निपटना होगा और जो व्यापार करते हैं उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्हें छोड़ा नहीं जाना चाहिए और कानून के शिकंजे में लाना चाहिए।

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