नीमच। प्रभु की भक्ति मन की ड्यूटी है। भोजन में भक्ति मिले तो प्रसाद बन जाता है। शब्दों में भक्ति मिले तो शब्द प्रार्थना बन जाते हैं। प्रवास में भक्ति मिले तो प्रवास यात्रा बन जाता है। पत्थर में भक्ति जुड़े तो पत्थर प्रतिमा बन जाता है। इंसान में भक्ति जुड़े तो इंसान भगवान बन जाता है। यह बात साध्वी मुक्ति प्रिया श्रीजी महाराज साहब ने कही। वे शुक्रवार सुबह जैन भवन में श्री भीड़ंभजन पाश्रर्वनाथ मंदिर ट्रस्ट जैन श्वेतांबर समाज द्वारा अष्टान्हीका महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित पत्रिका आलेखन कार्यक्रम में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि श्रैणिक महाराजा ने प्रभु महावीर की अनन्य भक्ति की जिससे वे आगामी चौबीसी में तीर्थंकर बनेंगे। रावण ने अष्टापद पर्वत पर प्रभु भक्ति की करते तीर्थंकर पद को प्राप्त करना निश्चित किया। साध्वी मुक्ति प्रिया श्रीजी महाराज साहब के सान्निध्य में साध्वी मृदु प्रिया श्रीजी महाराज साहब ,साध्वी ऋजु प्रिया श्रीजी महाराज साहब, साध्वी हर्ष प्रिया श्री जी महाराज साहब, साध्वी जिन प्रिया श्रीजी महाराज साहब, अर्हम प्रिया श्रीजी महाराज साहब, शिवम प्रिया श्रीजी महाराज साहब, युगदि प्रिया श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा 10 के सान्निध्य में अष्टान्हीका महोत्सव का आयोजन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ 28 फरवरी से 5 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर समाज के गणमान्य पदाधिकारियों द्वारा अष्टानिका महोत्सव की पत्रिका का आलेखन कर विमोचन किया गया।
सर्वप्रथम कुंवारी कन्याओं द्वारा पत्रिका पर कुमकुम तिलक से छांटना किया गया एवं कुंवारी कन्याओं द्वारा समाज के वरिष्ठ गणमान्य पदाधिकारियों का कुमकुम तिलक लगाकर अक्षत से स्वागत किया गया। इस अवसर पर जैन समाज के वरिष्ठ मनोहर सिंह लोढ़ा,अखेसिंह कोठारी, प्रेमप्रकाश जैन सचिव मनीष कोठारी , राजकुमार बोहरा, माणकलालजी नागोरी, प्रेमचंद कोठारी, बाबूलाल लोढ़ा , शोभागमल डोसी, पारस लसोड़, अनील नाहटा यशवंतसिंह लोढा आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे। इसके साथ ही सभी समाज जनो ने ढोल ढमाकों के साथ पत्रिका की शोभायात्रा निकाली। जो जैन भवन मार्ग 40 विद्युत केंद्र पुस्तक बाजार होते हुए भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर पहुंचकर पत्रिका समर्पण धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम में परिवर्तित हो गई। इस अवसर पर साध्वी मुक्तिप्रिया श्रीजी मसा द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पत्रिका समर्पण का कार्यक्रम विधि विधान के साथ पूर्ण करवाया गया। श्री भीड़भंजन पार्श्वनाथ मंदिर में अष्टान्हीका महोत्सव की पत्रिका समर्पित की गई।