मनासा। गांव नलखेडा में चल रही रामलीला के छठवे दिन सांस्कृतिक मंच से युवा कलाकारों ने राम भरत मिलाप, केवट का भगवान को गंगा पार करवाना, निषाद का भगवान राम से मिलन, राजा दशरथ का राम के वियोग में स्वर्ग सिधारना, कैकई को भरत राज्याभिषेक के लिए विनय अनुनय करने सहित अन्य प़संगों का सजीव चरित्र चित्रण किया। इस दोरान राजा दशरथ को श्रवण कुमार के श्राप के तहत अपने पुत्र राम के वियोग में प़ाण त्यागने का करूणामय अभिनय किया गया। साथ ही केवट द्वारा भगवान राम सीता एवं लक्ष्मण को सरयू नदी पार करने के लिए मना करने पर केवट की भक्ति का रहस्यमय चित्रण किया गया। केवट ने भगवान से कहा कि हे प़भु आपके चरणों में ज्यादू है जिस प़कार अपके मात्र चरण स्पर्श से पत्थर की शीला नारी बन गई, यदि ऐसे में मेरी नाव भी नारी बन गई तो मैं मेरे परिवार का भरण पोषण केसे करूंगा। केवट भगवान के चरणों को धोकर उनकी भक्ति पाना चाहता है तो उसने भगवान के चरण को धोकर उनकी भक्ति को प़ाप्त किया। वही धरमात्मा भरत ने अपने परिजनों के साथ चित्रकुट पहुचकर भगवान राम को अयोध्या लाने का बहुत प़यास किया। लेकिन भगवान ने पिता जी का वचन जुटा नहीं हो,मुजे चौदह वर्ष तक वनवास में ही रहना होगा। इस बीच भरत एवं राम के बीम मार्मिक प़संग का सजीव चरित्र चित्रण किया गया। इस अवसर पर जिला किसान कांग़ेस अध्यक्ष सुरेश धनगर, जनपद सदस्य सीताराम पाटीदार, ललीत पुरोहित, प़स्फछटन समिति अध्यक्ष मुकेश पाटीदार, समाजसेवी मुकेश पाटीदार, राजु कनेरिया, आर्मीमेन अजय राठोर सहित बडी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे। इष दोराश रामलीला में भरत विजय शर्मा, दशरथ कैलाश राठोर, केवट रामनिवास कनेरिया, कोशल्या हरिश शर्मा सहित अन्य कलाकारों ने अपने अभिनय से उपस्थित श्रोताओं को खुब आनन्दित किया।