नीमच/मंदसौर। एक तरफ जहां रबी सीजन की फसलें खेतों में पककर तैयार खड़ी है। कहीं तो खेतो में किसानो ने अधिकतर फसलों को काटकर निकालने के लिए रख रखा था। सबकुछ अच्छा चल रहा था और किसान भी इस मुख्य फसल का इंतजार कर रहा था। लेकिन प्रकृति ने किसानो के सपनो और मेहनत के साथ खिलवाड़ कर दिया।
नीमच-मंदसौर जिले में बीते कल से हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों पर वज्रपात का काम किया है। मंदसौर जिले का सीतामऊ, गरोठ, दलौदा, मल्हारगढ़ हो या नीमच जिले का रतनगढ़, मनासा, जीरन क्षेत्र हर तरफ से इस आफत के ही समाचार मिल रहे है। जहां बीते कल और आज तेज बारिश के साथ ओलवृष्टि हुई जिससे फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।
नीमच-मंदसौर जिला जहां सर्वाधिक अफीम उत्पादक जिलों में आते है और यह समय अफीम किसानो के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण रहता है। इस समय डोड़ो पर लूनी-चीरनी का कार्य किसान करते है। यही वो समय रहता है जब अफीम किसान को अपनी मेहनत का फल मिलता है। लेकिन इस बारिश और ओलावृष्टि से अफीम डोड़ो को काफी नुकसान पहुंचा है। कुछ क्षेत्रों में ओलों की वजह से जहां डोड़े टूट गए तो कहीं बारिश से डोड़ो में चीरा लगाने के बाद निकला अफीम बारिश से धूल गया। इस बेमौसम बारिश से अफीम किसान काफी मायूस नजर आ रहा है। औसत पूरी नहीं होने के डर से पट्टा कटने की चिंता सताने लग गई है।
वहीं दूसरी फसलों की बात की जाए तो इस बेमौसम बारिश से गेहूं, चना, इसबगोल, धनिया, अलसी, कलोंजी, लहसुन आदि फसलों में भी नुकसान हुआ है। वहीं बात करें तो इस बारिश और ओले गिरने से सबसे ज्यादा नुकसान कलोंजी, धनिये, अलसी और गेहूं में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। किसान जहां पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है उसपर ये वज्रपात किसानो की कमर तोड़ने का काम कर रही है।
नीमच-मंदसौर जिलों के किसानो को अब सरकार से ही आस बची है। किसानो की मांग है की जल्द से जल्द प्रशासन अपनी टीम को नुकसान का आंकलन करने के लिए गाँवो में भेजे। सर्वे करवाए और उचित मुआवजा दे जिससे थोड़ी राहत अन्नदाता को मिल सके।