दूदरसी । आज 6 मार्च को 3 बजे लगभग अचानक बे मौसम बरसात शुरू हो गई देखते देखते मुसलाधार बारिश के साथ चने और मक्का के आकार के ओले गिरने लगे। बरसात करीबन 25 मिनट तक हुई जिसके कारण किसानों की कटी हुई और खड़ी फसलों में नुकसान हुआ है। गेहूं, चना, मैथी और ईसबगोल की फसलों में तो नुकसान हुआ ही है, किन्तु अफीम काश्तकारों को शत प्रतिशत नुकसान होने की खबर सामने आई है। क्योंकि वर्तमान में अफीम फसलों में चिराई लुवाई का क्रम अनवरत जारी है। आज इस आसमानी आफ़त ने अफीम का सब दूध धो डाला है। अब किसानों को अफीम का पट्टा बचाने की चिंता सताने लगी है, क्योंकि अफीम विभाग द्वारा तय औसत से कम अफीम देने वाले किसानों के पट्टे काट दिए जाते हैं। ऐसे में आज अफीम का दूध धूल जाना औसत में कटौती के रूप में देखा जा रहा है।
बेमौसम बरसात से हुई फसलों में नुकसान को लेकर किसानों ने सरकार से सर्वे करा कर राहत देने की अपील की है।
गांव दूदरसी के उप सरपंच प्रतिनिधि अशोक कुमार पाटीदार ने बताया कि जिस वक्त पानी आया हम सभी जने अफीम चिराई का कार्य कर रहे थे। अचानक पानी की तेज बौछारों के साथ ओले भी गिरने लग गए। हमने वृक्ष के नीचे शरण ली किन्तु अफीम पूरी तरह धूल गई ।
गांव खेड़ा केसुंदा निवासी प्रभुलाल आंजना ने बताया कि हम खेत पर मैथी काटने का कार्य कर रहे थे कि अचानक तेज बरसात होने लगी और ओले भी गिरने लगे हम सभी ने वृक्षों के नीचे खुद को बचाया। हमारे गांव में तो सबसे ज्यादा पानी से फसलों में नुकसान हुआ है। इसबगोल पूरी तरह खत्म हो गया है।
अचानक इस बेमौसम बरसात से किसानों की गाढ़ी कमाई पल भर में तबाह हो गई। अब देखना यह है कि सरकार किसानों की किस तरह मदद करती है। किसानों को राहत देने की दिशा में सही कदम उठाती है या फिर हमेशा की तरह वही ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होती है। यह एक विचारणीय प्रश्न है।