नीमच। संसार में जीवन यापन करने के दौरान आए दिन विपरीत परिस्थितियां आती है। विपरीत परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति धैर्य और सहनशीलता नहीं खोता है वह आत्म शांति को प्राप्त करता है। जिस प्रकार मंदिर में नीव का पत्थर नीचे दबने का दबाव सहन करता है तभी वह शांति को प्राप्त करता है। नींव का पत्थर नीचे दबने के बाद भी महान आधार कहलाता है।यह बात आचार्य प्रवर 1008 रामलाल जी महाराज साहब ने कही। वे श्री साधुमार्गी जैन श्रावक संघ जैन नीमच के तत्वावधान में जवाहर नगर समता भवन सभागार में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग संसार के उत्साह में दौड़ भाग करता है लेकिन आत्मशांति और आत्म कल्याण का मार्ग धर्म की राह पर ही मिलता है आज धर्म की सीटें रिक्त है युवा वर्ग चिंतन करें और अपने कल्याण का सही मार्ग चयन करें।संतो को सुनकर कितना समझा, सुनकर परिवर्तन नहीं हुआ तो लाभ नहीं मिलता है।संसार की भौतिक सुख सुविधाओं का त्याग किए बिना आत्म कल्याण की शांति नहीं मिलती है। विभिन्न समुदाय में विभिन्न सोच के कारण टकराहट होती है। जहां विचार समान होते हैं वहां शांति रहती है। जिस प्रकार एक शरीर में पांच इंद्रियों को नियंत्रण करना कठिन होता है उसी प्रकार भिन्न भिन्न विचार धाराओं के समुदायों को एक करना भी कठिन होता है। जहां टकराहट है। वहां समाधान जरूर होता है। विद्या ग्रहण करने वाला विद्वान होता है ज्ञान को जीवन में आत्मसात करने वाला ज्ञानी होता है। विद्वान दुखी हो सकता है लेकिन ज्ञानी कभी दुखी नहीं होता है। पुण्य प्रबलता बिना मान सम्मान नहीं मिलता है।सोने की परख जानकार, हीरे की परख जोहरी ही कर सकता है। शांति के लिए संतोष का ध्यान करना चाहिए। असंतोष होता है वहां शांति का सुख मिलता है।युवा वर्ग सीधे उपदेश नहीं देवे उसके लिए स्वयं जीवन जिए।समस्या का समाधान समय पर छोड़ देना चाहिए। क्रोध कैंसर से ज्यादा ,अहंकार लकवे से ज्यादा खतरनाक होता है।
धर्म सभा में हर्षित मुनि महाराज ने कहा कि स्व कल्याण की ओर ध्यान देना चाहिए व स्व कल्याण को सुरक्षित रखना चाहिए तभी चित्त समाधि बरकरार रह सकती है। हमारी संस्कृति में मस्ती और आनंद का अधिकार धर्म के पास है लेकिन पाश्चात्य संस्कृति में अधिकार धन के पास है। ग्रृहस्थ को धन की आवश्यकता होती है।पुनिया श्रावक धनवान नहीं था लेकिन शांति उसकी रग-रग में व्याप्त थी।इस अवसर पर आचार्य श्री ने सभी उपस्थित समाज जनों को मांगलिक श्रवण कराकर आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर महिला मंडल ने धन्य है जिनवाणी गुरुवर धन्य है गीत प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय संयोजक महेश नाहटा ने कहा कि गुरुदेव के सानिध्य में 377 दीक्षा हो चुकी है। संयम जीवन का पालन करते हुए गुरुदेव ने पवित्र भाव के साथ साधना की ऊंचाइयों को प्राप्त किया है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज जनों ने आयम्बिल तप, उपवास, एकाशना आदि का संकल्प लिया।
इस अवसर पर नीमच सिटी श्री संघ के अध्यक्ष उमराव सिंह राठौड़, नरेंद्र गांधी, शौकीन मुनेत सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे धर्म सभा का संचालन महेश नाहटा ने किया।गुरुदेव की धर्म सभा में किसी को भी मोबाइल लैपटॉप घड़ी कैमरा ले जाने की स्वीकृति नहीं मिलती है।