बड़वानी। जिले में खाद वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर करी स्थित खाद केंद्र पर बुधवार को किसानों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। किसान 50 से 70 किलोमीटर तक का सफर तय कर खाद लेने पहुंचे। कई किसान सुबह 6 बजे से लाइन में लगे रहे, लेकिन दोपहर तक भी उनका नंबर नहीं आया।
ग्राम उपला के किसान रावलिया ने बताया कि उनके गांव के आसपास खाद वितरण केंद्र नहीं होने के कारण उन्हें करी आना पड़ता है। वे सुबह 6 बजे घर से निकले और आने-जाने में करीब 1500 रुपए तक का भाड़ा खर्च हो जाता है। किसानों का कहना है कि दूर से खाद लेने आने के बाद घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है, जिससे खेती का काम भी प्रभावित हो रहा है।
50 किलोमीटर दूर से पहुंचे किसान
गोलवाड़ी के किसान प्रताप करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर करी खाद केंद्र पहुंचे। उन्होंने बताया कि खाद तो मिल रही है, लेकिन समय पर नहीं मिलती। घंटों कतार में खड़े रहना पड़ता है। किसानों ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि केंद्र पर रखा मटका खाली है और प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
एक कर्मचारी बढ़ाने की मांग
सजवानी के किसान इलाम सिंह सुबह 9 बजे से लाइन में लगे थे। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक प्रक्रिया के लिए यदि एक कर्मचारी और बढ़ा दिया जाए तो किसानों का काफी समय बच सकता है। किसानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त खाद केंद्र खोलने, बायोमेट्रिक के लिए अतिरिक्त कर्मचारी लगाने और केंद्रों पर पेयजल, छाया व शौचालय की बेहतर व्यवस्था करने की मांग की है।
प्रशासन का दावा- खाद का पर्याप्त स्टॉक
करी खाद केंद्र की क्षेत्र सहायक जाग्रति सांवले के अनुसार केंद्र पर 600 टन यूरिया, 150 टन डीएपी और 200 टन एनपीके उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में दो मशीनों के माध्यम से खाद का वितरण किया जाता है। केंद्र पर मटका, हैंडपंप, टिन शेड और बैठने की व्यवस्था होने का भी दावा किया गया है।
पर्याप्त स्टॉक के बावजूद लंबी कतारें
प्रशासन जहां खाद का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा है, वहीं किसानों को खाद लेने के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त वितरण केंद्र शुरू किए जाएं और बायोमेट्रिक प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए तो उन्हें काफी राहत मिल सकती है। किसानों की मांग है कि खाद के लिए उन्हें 50 से 70 किलोमीटर दूर न जाना पड़े और पूरा दिन लाइन में खड़े होकर बर्बाद न करना पड़े।