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July 8, 2023, 7:14 pm
BIG NEWS : सब्जी मार्केट का सरताज बना टमाटर, हरी सब्जियों के भाव आसमान पर, बेतहाशा महंगाई से त्रस्त हुई जनता, पढ़े आसिफ अली की खबर    

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नीमच। आम साधारण जनता इस समय इस महंगाई के दौर में सबसे ज्यादा गृहस्थी चलाने से जूझ रही है। जी हां यह दौर में महंगाई अपने चरम पर है। भौतिक वस्तुओं के दाम बढ़ जाए तो चल जाता है किंतु आवश्यक रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ना गरीब आदमी की सेहत के लिए हानिकारक है। लगभग जरूरत वाली दैनिक वस्तुओं के दाम एवरेस्ट पर पहुंच चुके हैं। वैसे भी जनता लॉकडाउन के बाद पेट्रोल डीजल और गैस के दामों से त्रस्त हो चुकी है और अब सब्जी के दामों में वृद्धि से जूझ रही है। शहर में इन दिनों कोई सी भी हरी सब्जी ले लो उसके दाम से आपको झटका लगेगा। 
सब्जी मार्केट में इन दोनों सबसे ज्यादा करंट का झटका लाल टमाटरों के भाव से लग रहा है। परंपरागत खानदानी टमाटर की चर्चा इन दोनों सभी जगह हो रही है। या यूं कहें कि लाल सेवफल के साथ बराबरी में लाल टमाटर पहुंच चुका है। शहर में आज टमाटर का भाव 160 रुपए प्रति किलो रहा। यानी की टमाटर का सितारा बुलंदी पर है। आमतौर पर 20 रूपए किलो बिकने वाला लाल टमाटर इतनी ऊंचाई पर पहुंच चुका है। कमजोर दिलवाले सब्जी मंडी में सब्जियों के भाव पूछने से कतरा रहे हैं। बे मौसम में आ रही मेथी की सब्जी आज 200 किलो बिकी। 
आज जब सब्जी मार्केट का दौरा किया और भाव की जानकारी निकाली जोकि ठेले वालों और फुटकर धंधा करने वालों से ली गई अनुसार है। क्योंकि आम जनता और ग्रहणियों द्वारा खरीदारी इनसे ही की जाती है। गोभी का भाव 80 रूपए से लेकर 100 रुपए किलो तक है। हरी मिर्च100 रूपए प्रति किलो, चवला फली 100 रूपए प्रति किलो, बढ़िया करेले 100 रुपए प्रति किलो, तिरोई 100 रूपए प्रति किलो। यानी की सभी सब्जियों के भाव लगभग तिगुना चौगुनी तरक्की कर चुके हैं। सब्जी मार्केट में बिकने वाला लहसुन भी अपना जलवा दिखा रहा है। लगभग 200 रूपए प्रति किलो बिक रहा है। हां इस बार प्याज हिसाब किताब में बिक रहा है। 
सब्जी मंडी में भाव को लेकर कई सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि गर्मी के मौसम में आवक कम होने के कारण भाव बढ़ जाते हैं। सब्जी मंडी में फुटकर बेचने वाले अपनी जगह सही है। सब्जी के भाव में उतार-चढ़ाव बिचौलियों और दलालों के बाएं हाथ का खेल है। किसान और आम जनता का हाल एक जैसा है, बीच वाले मजे कर रहे हैं। इधर आम जनता का मानस टटोलने पर निष्कर्ष यह निकला की इस बार भाव कुछ अधिक हैं इसलिए ग्रहणियों को गृहस्ती चलाने में परेशानी आ रही है। आज के दौर में बढ़ती महंगाई से आम जनता पहले ही परेशान है ऐसे में दो वक्त की रोटी सब्जी खाने वाली जनता की थाली तक महंगाई पहुंच चुकी है। पेट्रोल डीजल और गैस से जहां मिडिल क्लास फैमिली जूझ रही है अब सब्जी के भाव से भी जूझना पड़ रहा है। सिर्फ गरीब आदमी को ही महंगाई का एहसास नहीं हो रहा है बल्कि बड़े बड़े लोगों को भी महंगाई का एहसास हो रहा है। सब्जी मार्केट में बढ़ती हुई महंगाई से वेजीटेरियन और नॉन वेजिटेरियन दोनों ही त्रस्त हो चुके हैं। वैसे भी कुकड़ू कुं मुग़ले आज़म, अनारकली, के भाव दायरे से बाहर जा चुके हैं। कुल मिलाकर पहले घरेलू महिलाएं 100 का नोट लेकर सब्जी मंडी जाती थी और थैले में सब्जी लाती थी। अब अब 500 का नोट लेकर सब्जी मंडी जाओ खरीदारी करने के बाद हरे धनिए के पैसे बच जाए तो गनीमत समझो। 

आम जनता तो पिछले तीन वर्षों से हर मामले में जूझ रही है। सबसे पहले नोटबंदी फिर जीएसटी, उसके बाद सबसे भयंकर कोरोना लॉकडाउन ने काम धंधों व्यापार व्यवसाय की कमर तोड़ दी। आज भी शहर के मार्केट में अजीब सी खामोशी का एहसास होता है। आज के युग में दो वक्त की रोटी इंसान चैन सुकून से खा ले वही बड़ी बात है। महंगाई की इस दौर में इंसान सिर्फ रोटी सब्जी ही तो खा रहा है। अब महंगाई की आग खाने की थाली तक पहुंच चुकी है तो आम आदमी का परेशान होना स्वाभाविक है। अब अब सावन महीना शुरू हो चुका है रिमझिम बारिश का दौर चालू है। उम्मीद है हरी सब्जियों के भाव चित्तौड़ के किले से नीचे उतर जाएंगे ?

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