खरगोन। स्कूल में अव्यवस्थाएं कैसे पढ़ेंगे आगे बढ़ेंगे खरगोन जिले के ग्राम कोठा बुजुर्ग के नन्हे-मुन्ने शौचालय तो बना हुआ है। लेकिन पानी बाल्टी भर के अंदर ले जाना पड़ता है। शिक्षक का कहना है कि बच्चे अपने घर से ही फ्रेश होकर आते हैं। किचन सेट बना है, जिसकी हालत जर्जर है, खुद शिक्षक कह रहे हैं कि खाना किचन सेट में नहीं बनता, समूह वाले घर से बना कर लाते हैं। बारिश होती है तो छत टपकती है, शिक्षक के हिसाब से, उस रोज छुट्टी करना पड़ती है 2 साल पहले स्कूल का श्याम पाठ उखड़ चुका है। अभी तक दुरुस्त नहीं हो पाया। पहली कक्षा से पांचवी तक साठ बच्चे दर्ज हैं, नई शिक्षा नीति सरकार ने बना दी है। लेकिन नई शिक्षा बच्चों को मिलना प्रारंभ नहीं हुई है ,शिक्षक दो हैं। एक अभी चार रोज पहले आए हैं, मिलाकर 3 हो गए हैं ,कक्षाएं 5 शिक्षक तीन एक शिक्षक को चुनावी काम में लगा दिया जाता है, बचते हैं दो कक्षाएं 5। स्कूल के 2 कमरों में 5 कक्षाओं के बच्चे बैठते हैं। स्कूल से सटकर किसी का बाड़ा हैं। भैंस खिड़की से स्कूल में हो रहे, क्रियाकलाप देख रही है। गांव में सक्षम लोगों के बच्चे, जिनकी संख्या लगभग 200 से ऊपर होगी निजी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। गरीबों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। बच्चों का स्तर भी आप देख सकते हैं कोई सही ढंग से पहाड़े नहीं बोल पाता तो किसी को अपना नाम अंग्रेजी में नहीं लिखते आता। जब सरकारी स्कूल की व्यवस्थाएं ऐसी होगी तो कौन समझदार व्यक्ति अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ा कर भविष्य बिगाड़ेगा।