चित्तौड़गढ़। पूज्य सिंधी पंचायत विकास समिति चित्तौड़गढ़ एवं भारतीय सिंधु सभा के संयुक्त तत्वावधान में झूलेलाल मंदिर परिसर में सिंध स्मृति दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं भगवान झूलेलाल की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
सिंधी समाज अध्यक्ष योगेश भोजवानी ने बताया कि 14 अगस्त 1947 को देश विभाजन के दौरान सिंध प्रांत पाकिस्तान के हिस्से में चला गया था। इसके बावजूद सिंधी समाज के लोगों ने अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए भारत में रहने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण लाखों सिंधी परिवार बेघर हो गए थे और आज भी उस पीड़ा को याद करते हैं।
उन्होंने कहा कि सिंधी समाज अपनी संस्कृति, परंपराओं, लोककला और ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए है तथा सिंध प्रांत के भारत में विलय को ही भारत माता का पूर्ण श्रृंगार मानता है। इसी स्मृति को जीवित रखने के लिए प्रतिवर्ष सिंध स्मृति दिवस मनाया जाता है।
स्वतंत्रता संग्राम में सिंधियों के योगदान को किया याद
झूलेलाल युवा सेवा समिति के पूर्व अध्यक्ष ललित वंगानी ने कहा कि भारत की आजादी के महासंग्राम में सिंधी स्वतंत्रता सेनानियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विभाजन के बाद भारत आए सिंधी समाज के लोगों ने शरणार्थी के रूप में जीवन की शुरुआत की, लेकिन अपने परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर समाज ने हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की।
सिंध की समृद्ध विरासत पर हुई चर्चा
भारतीय सिंधु सभा के जिलाध्यक्ष जोधराज तनवानी ने कहा कि विभाजन से पूर्व सिंध प्रांत एक समृद्ध और खुशहाल क्षेत्र था, जहां लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते थे। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज वहां के हालात पहले जैसे नहीं रहे।
संगोष्ठी को जेकी आहुजा, जेपी वंगानी, कमल चंचलानी, कपिल मलानी, राजेश तुलसानी, शंकर वंगानी एवं पूर्व पार्षद मनोज भोजवानी ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में रवि मलानी, मनोज देवानी, सुनील मलानी, मनोज मेठानी, आशा आहुजा, शारदा विधानी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।