खरगोन। महात्मा गांधी ने ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्राम स्वराज का सपना देखा था, लेकिन ग्राम पंचायत देवली में ग्राम सभा की बैठक के दौरान इस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। पंचायत में ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसे सरपंच ने बुलाया था, लेकिन वे स्वयं बैठक में उपस्थित नहीं हुए।
नियम के अनुसार ग्राम सभा का सभापति सरपंच होता है और उसी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच की गैरमौजूदगी के कारण ग्राम सभा महज औपचारिकता बनकर रह गई।
ग्रामीणों के अनुसार यह पहली बार नहीं है। 24 जनवरी 2026 को हुई ग्राम सभा में भी बार-बार बुलाने के बाद सरपंच पहुंचे थे। उस दौरान ग्रामीणों ने पंचायत के कामकाज और हिसाब-किताब की जानकारी मांगी थी। विवाद की स्थिति बनने के बाद ग्राम सभा निरस्त कर दी गई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार भी वे पंचायत के कामकाज का हिसाब मांगने पहुंचे थे, लेकिन केवल पीएम आवास योजना की सूची का वाचन किया गया और ग्राम सभा समाप्त कर दी गई। ग्रामीणों के सवालों पर न कोई चर्चा हुई और न ही कोई जवाब या निर्णय सामने आया।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे पंचायत के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि सरपंच पंचायत की जिम्मेदारी संभालने में रुचि नहीं रखते हैं तो उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।