मंदसौर। सावन के तीसरे सोमवार को मंदसौर के आराध्य भगवान पशुपतिनाथ महादेव रजत प्रतिमा के रूप में शाही पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले। पशुपतिनाथ मंदिर से शुरू हुई शाही पालकी यात्रा में हजारों श्रद्धालु, कावड़ यात्री और शहरवासी शामिल हुए। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से पूरा शहर शिवभक्ति में सराबोर नजर आया। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने पालकी का पुष्पवर्षा एवं पूजा-अर्चना के साथ स्वागत किया।
रजत प्रतिमा के साथ नगर भ्रमण-
शाही पालकी यात्रा का आयोजन शयनकालीन आरती युवा पालकी मंडल के तत्वावधान में किया गया। दोपहर में पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से पालकी यात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमा को शाही पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया गया। यात्रा में बड़ी संख्या में कावड़ यात्री और श्रद्धालु शामिल हुए।
झांकियों और ट्रॉलियों ने बढ़ाई शोभा-
शाही पालकी यात्रा में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संदेशों पर आधारित आकर्षक झांकियां और ट्रॉलियां शामिल रहीं। खाटू श्यामजी, राधा-कृष्ण रास, कमल का फूल, श्री महाकाल-रावण, महाकाल पालकी और अघोरी ग्रुप की झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनीं।
नासिक ढोल और कलाकारों ने बांधा समां-
यात्रा में बैंड-बाजे, नासिक ढोल और शहनाई की प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। युवतियों के नृत्य एवं विभिन्न शहरों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों और करतबों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालु पालकी के दर्शन कर भगवान पशुपतिनाथ का आशीर्वाद लेते नजर आए।
इन मार्गों से गुजरी शाही पालकी-
शाही पालकी पशुपतिनाथ मंदिर से रवाना होकर वीर सावरकर पुलिया, धान मंडी, शुक्ला चौक, नयापुरा रोड, गोल चौराहा, बीपीएल चौराहा, गांधी चौराहा, नेहरू बस स्टैंड, भारत माता चौराहा, घंटाघर और मंडी गेट सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। देर शाम पालकी के मंदिर परिसर पहुंचने का कार्यक्रम रहा।
शयन आरती के साथ हुआ समापन-
शाही पालकी यात्रा का समापन रात करीब 8 बजे पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में शयन आरती एवं विसर्जन के साथ किया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यात्रा मार्ग पर पुलिस एवं प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की गई।
14 वर्षों से निकाली जा रही शाही पालकी-
शयनकालीन आरती मंडल के अजय भाटी ने बताया कि भगवान पशुपतिनाथ की रजत प्रतिमा को शाही पालकी में विराजित कर पिछले 14 वर्षों से लगातार नगर भ्रमण कराया जा रहा है। इस वर्ष भी कावड़ यात्रियों सहित हजारों श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। अन्य शहरों से भी झांकियां और कलाकार पहुंचे, जिससे शाही पालकी यात्रा की भव्यता और बढ़ गई।