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August 17, 2026, 7:06 pm
KHABAR : सावरकर पर प्रश्न पूछना अपराध नहीं, शिक्षक का निलंबन वापस हो, शैक्षिक महासंघ, शिक्षक संघ ने कलेक्टर कार्यालय पर धरना देकर प्रधानमंत्री, केरल राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, पढ़े हरिओम माली की खबर

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नीमच। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर मध्यप्रदेश शिक्षक संघ की जिला इकाई नीमच के बैनर तले शिक्षकों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री, केरल के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर केरल के कासरगोड जिले के कुंबला सब-डिस्ट्रिक्ट में आयोजित विद्यालयी Social Science Freedom Quiz से जुड़े मामले में शिक्षक श्री गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल वापस लेने की मांग की गई।

महासंघ के प्रांतीय कोषाध्यक्ष विनोद कुमार पुनी ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं। उनके जीवन, ब्रिटिश शासन द्वारा दिए गए दंड तथा अंडमान की सेलुलर जेल में कारावास का अध्ययन इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछना न अपराध है और न ही अनुशासनहीनता। उनके विचारों से सहमति-असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को इतिहास से बाहर नहीं किया जा सकता।

जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि यदि प्रश्नावली संबंधित शिक्षा अधिकारियों के स्तर पर अनुमोदन के बाद विद्यालयों में प्रसारित हुई थी, तो केवल प्रश्न तैयार करने वाले शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। प्रश्न की तैयारी, स्रोत, जांच एवं अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले निलंबन जैसी कार्रवाई से शिक्षकों में भय और आत्म-सेंसरशिप का वातावरण बन सकता है।

जिला सचिव जगदीश बारीवाल ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा की संपत्ति नहीं है। गांधी, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सरदार पटेल, लोकमान्य तिलक, श्री अरविंद और सावरकर सहित अनेक व्यक्तित्वों के योगदान से स्वतंत्रता आंदोलन की राष्ट्रीय गाथा बनी। विद्यार्थियों को स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं एवं प्रमुख व्यक्तित्वों का तथ्याधारित और समग्र अध्ययन कराया जाना चाहिए।

महासंघ ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, तर्कशीलता और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने की क्षमता विकसित करना है। शिक्षकों को राजनीतिक दबाव से मुक्त वातावरण मिलना आवश्यक है।

धरना-प्रदर्शन के बाद महासंघ ने शिक्षक श्री गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल वापस लेकर उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रदर्शन में प्रांतीय कोषाध्यक्ष विनोद कुमार पुनी, कुसुम शर्मा, जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा, जिला सचिव जगदीश बारीवाल, जिला उपाध्यक्ष भागीरथ गुर्जर, शबनम खान, बाबूलाल मेघवाल, ब्लॉक अध्यक्ष हुकुम सिंह चुंडावत, रविंद्र सिंह परिहार, राजेश चौधरी, रणवीर सिंह राठौड़, रीना जैन, सीता कुन्हारा, सुनीता शुक्ला, मंगला शर्मा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शैक्षिक महासंघ के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

क्या है मामला-
केरल के कासरगोड जिले के कुंबला एवं मंजेश्वरम उप-जिलों में आयोजित विद्यालयी Social Science Freedom Quiz में ब्रिटिश शासन के दौरान कठोर दंड प्राप्त करने वाले स्वतंत्रता सेनानी से संबंधित प्रश्न पूछा गया था, जिसका उत्तर विनायक दामोदर सावरकर बताया गया। प्रश्न को लेकर विवाद उत्पन्न होने के बाद शिक्षक श्री गुरु प्रसाद के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का अध्ययन राजनीतिक आग्रह के बजाय तथ्यों, प्रमाणों और ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर होना चाहिए।

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