सरवानिया महाराज।शिष्टाचार रहित भाषा के कारण जीवन मे सकंट कि स्थिति पैदा हो जाती हैं। भाषा के कारण कई बार विवाद का जन्म हो जाता है। इसलिए मानव जीवन में सभ्य और संस्कारित भाषा का उपयोग करना चाहिए। मनुष्य जीवन बहुत दुर्लभ है ये कई प्रकार के बंधनों को पार करने के बाद मिलता है। उक्त कथन सदर बाजार स्थित जैन समाज के महावीर भवन में 1008 आचार्य श्री विजयराज जी म.सा की आज्ञानुवर्तिनी महासतीया जी परम तपस्विनी विदुषी श्री मुक्ता श्रीजी म.सा ने कहें। मुक्ता श्रीजी म.सा ने फरमाया कि शरीर के अनेक कर्माे के बंधनों के कारण जीवन में यश और अपयश की प्राप्ति होती हैं । हमें अपने जीवन को धर्म ध्यान तप तपस्या आराधना मे लगाना चाहिए। आज का मनुष्य पैसे के पिछे वैसे ही भाग रहा है जैसे सुर्य कि किरणों के विपरीत हमारे शरीर की परछाई दिखती हैं। व्याख्यान की श्रृखंला मे पहले तपस्विनी उर्मी श्रीजी म.सा के प्रवचन जैन धर्म पर आधारित तथा बाद में बड़े महाराज सा. मुक्ता श्रीजी म.सा के मानव को जीवन कैसे जिना चाहिए ताकि हमारे सभी भव सुख सागर को प्राप्त हो सके पर आधारित प्रवचन सुनने को मिलते हैं। इसके साथ ही उज्जैन के राजा भृतहरि और विक्रमादित्य तथा बेताल के प्रसंगों का वर्णन भी बताया जाता हैं।
आपको बता दें कि महावीर भवन सरवानिया महाराज पर मुक्ता श्रीजी म.सा , उर्मी श्रीजी म.सा , महिमा श्रीजी म.सा आदि ठाणा तीन चातुर्मास काल हेतू विराजमान है। प्रतिदिन व्याख्यान प्रातःकाल 9.30 बजे से प्रारंभ होकर 11 बजे तक चलते हैं। जैन श्री संघ ने सभी जैन एंव जैनतर धर्मावलंबियों से धर्म लाभ लेने की अपील की है।